Theory of Justice by John Rawls in hindi

न्याय का सिद्धान्त जॉन रॉल्स John Rawls : A Theory of Justice (Hindi)

Hello दोस्तो ज्ञानोदय में आपका स्वागत है । आज हम बात करते हैं, जॉन रॉल्स के न्याय के सिद्धांत के बारे में (Theory of Justice by John Rawls in hindi) बहुत ही आसान भाषा में जो कि आपको आसानी से समझ में आ जायेगा ।

जॉन रॉल्स ने अपनी पुस्तक ‘A Theory of Justice’ में न्याय के सिद्धांत को स्पष्ट किया है । 19वीं शताब्दी में न्याय का उदारवादी सिद्धांत लोकप्रिय था । लेकिन रॉल्स एक ऐसा सिद्धांत बनाना चाहा जो कि आधुनिक लोकतंत्र और कल्याणकारी राज्य के अनुरूप हो । जॉन रोल ने न्याय के लिए वितरण को आधार बनाया । रॉल्स के अनुसार जब तक वितरण ठीक से नहीं होगा तब तक न्याय की स्थापना नहीं हो सकती । तो इसलिए जॉन रॉल्स ने मानव की आवश्यकताओं को दो वस्तुओं में विभाजित किया है या दो भागों में बांटा जा सकता है ।

1 . सामाजिक पदार्थ और

2 . प्राकृतिक पदार्थ

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सामाजिक पदार्थ ऐसी चीजों को कहा जाता है जिन का बंटवारा सामाजिक संस्थाओ के आधार पर किया जाता है या समाज के द्वारा किया जाता है । जैसे वेतन संपत्ति, अधिकार, स्वतंत्रता । दूसरे हैं

प्राकृतिक पदार्थ:- प्राकृतिक पदार्थ उन पदार्थों को कहते हैं जिनका बटवारा सामाजिक संस्थाओं के द्वारा नहीं किया जा सकता । जैसे बुद्धि, कल्पनाशीलता, साहस ।

इस तरीके से सामाजिक पदार्थों का वितरण करके पूरे तरीके से समाज में न्याय की स्थापना की जा सकती है । जॉन रोल ने सामाजिक समझौतों का समर्थन किया है । जितने भी उदारवादी विचारक हैं, सभी ने सामाजिक समझौते का समर्थन किया है । जॉन रोल भी एक उदारवादी विचारों थे ।

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जॉन रोल का यह कहना था कि लोगों ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समाज बनाया । लेकिन उनका उद्देश्य था कि ऐसा समाज बनाया जाए जिसमें लोगों को न्याय मिल सके । इस बारे में रोल ने कई अनुमान लगाए । रोल के अनुसार सबसे पहले प्रारंभिक अवस्था में लोग एक दूसरे के प्रति उदासीन थे । जब तक उनकी सभी जरूरतें पूरी होती रहती हैं, तब तक ना तो वह किसी दूसरे से नफरत करते और नाही घृणा करते, फिर लोग एक नए समाज के बारे में निर्णय देते हैं । मान लीजिए समाज बना नहीं है । समाज आपको हमें मिलकर बनाना है तो लोग एक ऐसा समाज बनाने के बारे में फैसला लेंगे जिसमें उनकी अधिकतर हितों की पूर्ति हो सके । जैसे उनको ज्यादा से ज्यादा अधिकार मिले । ज्यादा से ज्यादा स्वतंत्रता मिले और ज्यादा से ज्यादा हर किसी को वेतन मिले । हम ऐसा समाज बनाना चाहेंगे जिसमें हमारे ज्यादा से ज्यादा हित पूरे हो सकें । जो लोग समाज बनाएंगे उनको यह नहीं पता कि इस समाज में किस की स्थिति क्या होगी और कौन व्यक्ति कितना विकास करेगा । किसी को भी किसी की योग्यता के बारे में नहीं पता होगा यानी कौन गरीब होगा, कौन अमीर होगा, कौन ऊंची जाति का होगा और कौन नीची जाति का । और हर व्यक्ति चाहेगा कि कुछ ऐसे नियम बनाए जाएं कि गरीब से गरीब व्यक्ति भी निराश ना हो क्योंकि हर व्यक्ति को एक डर यह भी सताता है कि कहीं वही इंसान बेचारा गरीब ना हो जाए ।

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जॉन रॉल्स ने समाज में न्याय की स्थापना करने के लिए कुछ नियमों का समर्थन किया है । पहला है

एक समान मौलिक स्वतंत्रता:- रॉल्स का यह कहना है कि न्याय की स्थापना करने के लिए सभी को एक समान स्वतंत्रता मिले यानी सभी को ज्यादा ज्यादा से ज्यादा आजादी मिलनी चाहिए और बराबर आजादी मिलनी चाहिए । जॉन रॉल्स के अनुसार समाज ऐसा बनाया जाए जिसमें कम से कम आर्थिक और सामाजिक असमानता हो । इस तरह से समाज में एक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जिसमें सभी को न्याय मिल सके । जॉन रॉल्स ने

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पुनर्वितरण का समर्थन किया है, रॉल्स ने बताया है कि न्याय की स्थापना करने के लिए आय का पुनर्वितरण बहुत जरूरी है । योग्य लोग अपना विकास करें, लेकिन विकास करने का तरीका ऐसा हो जिससे गरीबों का भी लाभ हो सके और जो आय के पुनर्वितरण के लिए न्याय की स्थापना की जा सके । सबसे पहले सब को खुला छोड़ दिया जाए जिसके अंदर जितनी योग्यता है, वह अपनी काबिलियत के अनुसार आय अर्जित करेगा । फिर जो है एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें सभी को समान अवसर दिया जाए । अगर कोई फिर भी आगे नहीं बढ़ पाता है तो आय का पुनर्वितरण किया जाए यानी अमीरों से टैक्स लेकर उन्हें गरीबों में खर्च किया जाए । इस तरीके से जो अमीर है, वह टैक्स देकर थोड़ा सा नीचे आ सकते हैं । और जो गरीब लोग हैं वह ऊपर जा सकते हैं । इससे अमीरी और गरीबी के फासले को खत्म किया जा सकता है और गरीबी की स्थिति को कम किया जा सकता है । कहने का मतलब है कि अमीरों से कुछ पैसा लेकर उसकी कुछ छींटे गरीबों पर मार दी जाऐं जिससे कि उनकी गरीबी भी थोड़ी सी मिट सके । तो इस तरीके से गरीबों की मदद के लिए आय का पुनरवितरण होना चाहिये ।

कर व्यवस्था को लागू करके सेवाऐं व कल्याणकारी योजनाएं बनानी चाहिए । आरक्षण की व्यवस्था करनी चाहिए । जब इन तरीकों को अपनाया जाएगा तो समाज में अच्छे तरीके से न्याय की स्थापना हो सकती है । जॉन रॉल्स का यह कहना है कि न्याय की स्थापना तब हो सकती है, जब हम ‘पुरस्कार की जगह क्षतिपूर्ति’ पर ध्यान दें क्योंकि न्याय का संबंध पुरस्कार से नहीं बल्कि क्षतिपूर्ति से है ।

तो दोस्तों यह था आपका जॉन रॉल्स का न्याय का सिद्धांत (Theory of Justice by John Rawls -in hindi easy language-Political Science)

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