End of Bipolarity in Hindi दो ध्रुवीयता का अंत

दो ध्रुवीयता का अंत End of Bipolarity in Hindi

Hello दोस्तों ज्ञानोदय में आपका स्वागत है, आज हम आपके लिए लेकर आए 12th Class का दूसरा Chapter जिसका नाम है, दो ध्रुवीयता का अंत Last Time पर हमने पहला Chapter किया था, शीत युद्ध का दौर और उस चैप्टर को पढ़कर हमने जाना था कि किस तरीके से समाजवादी सोवियत संघ बना और दोनों महा शक्तियों के बीच में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच में लंबे समय तक शीत युद्ध चलता रहा | इस दूसरे चैप्टर में हम जानेंगे कि किस तरीके से साम्यवाद खत्म हो गया और शीत युद्ध का अंत हो गया।

सोवियत संघ में बहुत सी कमियां थी, इसीलिए सोवियत संघ का विघटन हुआ |

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सोवियत संघ में कमियों के कारण

1. लोकतंत्र का आभाव

जैसे कि सोवियत संघ के अंदर लोकतंत्र नहीं था, यानी कि उसके अंदर लोकतंत्र का अभाव था, एक ही राजनीतिक दल था और सभी शक्तियों पर उसी राजनीतिक दल का अधिकार था, इसलिए सोवियत संघ के अंदर लोकतंत्र की कमी थी |

2भ्रष्टाचार की अधिकता

दूसरी कमी सोवियत संघ की भ्रष्टाचार सोवियत संघ के अंदर भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा था, तमाम काम सरकारी कर्मचारियों के द्वारा किए जाते थे | सरकारी कर्मचारी अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते थे, इसीलिए लोग साम्यवाद के खिलाफ हो गए |

3. निजी संपत्ति रखने पर रोक

सोवियत संघ के अंदर तीसरी कमी थी निजी संपत्ति रखने का अभाव सोवियत संघ में लोगों को निजी संपत्ति रखने का अधिकार नहीं दिया गया था, जिससे लोगों को काम करने की प्रेरणा नहीं मिलती थी, क्योंकि संपत्ति तो रख ही नहीं सकते थे, इस कारण उत्पादन में भी कमी आने लगी इसीलिए लोग धीरे-धीरे करके साम्यवाद के खिलाफ हो गए |

4. प्रतियोगिता और गुणवत्ता की कमी

चौथी कमी थी प्रतियोगिता का ना होना और ना ही गुणवत्ता का क्योंकि हर चीज सरकार के द्वारा बनाई जाती थी, और हर चीज का बंटवारा भी सरकार के द्वारा ही किया जाता था | इसलिए प्रतियोगिता तो बिल्कुल नहीं थी और गुणवत्ता भी बिल्कुल नहीं थी इसलिए लोग घटिया वस्तुएं खरीदने के लिए मजबूर थे | इस कारण भी सोवियत संघ का विघटन हो गया |

5. स्वतंत्रता का आभाव

सोवियत संघ की पांचवी कमी थी स्वतंत्रता का अभाव | इसमें नागरिकों को स्वतंत्रता बहुत कम दी गई थी | रेडियो, टीवी, समाचार पत्र, पत्रिका आदि सभी पर सरकार का नियंत्रण था, लोगों को ना तो धार्मिक स्वतंत्रता थी और ना ही विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता | इसीलिए लोग साम्यवाद के खिलाफ हो गए |

6. अर्थव्यवस्था Fail होना

छठी कमी थी सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था fail हो गई थी, क्योंकि जब शीत युद्ध चल रहा था तो ज्यादातर धन हथियार बनाने और युद्ध की तैयारी पर खर्च किया जाता था, जबकि लोगों का जीवन स्तर बहुत ही निम्न था इसीलिए भी लोग साम्यवाद के खिलाफ हो गए और सोवियत संघ का विघटन हो गया | इस तरीके से सोवियत संघ के अंदर बहुत सारी कमियां थी जिसकी वजह से सोवियत संघ का विघटन हो गया ।

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1985 में मिखाईल गोरवाचेव सोवियत संघ के राष्ट्रपति बने उन्होंने सोवियत संघ के अंदर सुधार करने की दो नीतियों को अपनाया|

  1 . ग्लासनोस्त की निति जिसका मतलब होता है खुलापन और

1 प्रेसत्रोइका जिसका मतलब होता है पुनर्गठन

ग्लासनोस्त में चार काम किए गए

 1 जनता को अपनी इच्छा के अनुसार राजनीतिक दल बनाने का अधिकार दिया गया |

2 सरकार ने न्यूज़ पत्र, समाचार पत्र, रेडियो, टीवी आदि से अपना अधिकार हटा लिया और लोगों को विचार प्रकट करने की आजादी भी दे दी गई |

3 लोगों की स्वतंत्रता और अधिकारों को बढ़ावा दिया गया,  इसके साथ ही धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी दे दिया गया |

4 उद्योगों से सरकार का नियंत्रण भी हटा दिया गया लोगों को निजी उद्योग लगाने की परमिशन दे दी गई और निजी संपत्ति रखने का भी अधिकार दे दिया गया |

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तो यह था ग्लासनोस्त यानी कि खुलापन

दूसरी नीति थी प्रेस्त्रोइका, जिसमे तीन काम किये गये थे और तीनों ही काम बहुत खतरनाक थे | इन तीनों में से जो तीसरा काम था, जिसकी वजह से सोवियत संघ तहस-नहस हो गया बर्बाद हो गया और जिसकी वजह से सोवियत संघ का विघटन भी हुआ ।

1 सोवियत संघ में शामिल राज्यों को अपनी इच्छा अनुसार वार्सापेक्ट में शामिल होने या ना होने का अधिकार दे दिया गया  |

2 सभी संघ में शामिल राज्यों को अपनी इच्छा अनुसार अपनी विदेश नीति बनाने का अधिकार  दे दिया गया |

3 आखरी काम जो कि सबसे खतरनाक था, सोवियत संघ में शामिल राज्य को अपनी इच्छा अनुसार संघ से अलग होने का अधिकार दे दिया बस यही कहने की देर थी कि सोवियत संघ के टुकड़े टुकड़े हो गए और सोवियत संघ का विघटन हो गया |

हालांकि राष्ट्रपति गोर्वाचेव ने इन नीतियों को  सुधार करने के लिए अपनाया था लेकिन सुधार तो नहीं हो पाया उल्टा सोवियत संघ का विघटन हो गया | सोवियत संघ के बाद जो संघ से अलग हुए देश थे वह अपना तेजी से विकास करना चाहते थे, और तेजी से विकास करने के लिए पैसों की कमी थी इसलिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की सलाह पर शॉक थेरेपी को अपनाया गया शॉक थेरेपी का मतलब होता है, झटका देकर इलाज करना यानी कि एकदम से झटके में सब कुछ बदल देना या चेंज कर देना यानी साम्यवाद को एकदम से खत्म कर दिया जाए पर उसकी जगह पर एकदम से पूंजीवाद को अपना लिया गया था | लेकिन शॉक थेरेपी के अच्छे प्रभाव नहीं पड़े  बल्कि बहुत बुरे प्रभाव पड़े क्योंकि शॉक थेरेपी को अपनाने से सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था नष्ट हो गई थी | उन लोगों को बेहतर जीवन की जगह बर्बादी का सामना करना पड़ा | जितने भी उद्योग थे, उन सभी का निजीकरण कर दिया गया 90% उद्योग ऐसे थे जिन्हें बहुत ही कम कीमत पर निजी कंपनियों को बेच दिया गया, इसीलिए इसे इतिहास का सबसे बड़ी त्रासदी कहां जाता है, और उद्योगों के साथ साथ कृषि का भी निजीकरण कर दिया गया जिस से खाद्यान्न संकट पैदा हुआ और रोज़मर्रा की दैनिक आवश्यकताओं की चीजें थी उनकी कमी महसूस होने लगी जैसे दूध, ब्रेड, अंडा, अनाज, आदि |

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इसी के करण जो रूस की मुद्रा थी रूबल उसमें बहुत तेजी से गिरावट आने लगी | जिससे लोगों की जमा पूंजी बर्बाद हो गई गरीबी बेरोजगारी और कालाबाजारी को बहुत तेजी से बढ़ावा मिला और इन देशों ने अपने संविधान जल्दबाजी में तैयार किए और कहीं कहीं पर संविधान गलत रूप से तैयार हो गए जैसे कि राष्ट्रपति को ज्यादा शक्तियां दे दी गई और संसद कमजोर रह गई बहुत सारे देशों में न्यायपालिका को स्वतंत्रत बनाना अभी भी बाकी था |

तो दोस्तों यह था आपका 12वीं Class का 2nd Chapter दो ध्रुवीयता का अंत, अगर आपको इस Chapter के Detail में Notes चाहिए तो आप हमारे WhatsApp वाले नंबर 9999338354 पर Contact कर सकते हैं | आप इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ Share करें |

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धन्यवाद

This Post Has 2 Comments

  1. बहुत अच्छी जानकारी है । कृपया और भी चैप्टर बताये । धमयवाद

  2. Thank you sir…

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