Comparison in India and UK party System

भारत और ब्रिटेन की दलीय व्यवस्था में तुलना (Comparison in India and UK party System)

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Hello friends Gyaanuday में आपका स्वागत है । मैं नौशाद sir आपके सामने फिर हाजिर हूं, एक नया topic लेकर जिसका नाम है- ‘दलीय व्यवस्था’ यानी Party System । इसके अलावा तुलना करेंगे भारत और ब्रिटेन की दलीय व्यवस्था में ।

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हालाँकि राजनीतिक दलों को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है । बहुत सारे देशों के अंदर अलग अलग दल तरह की दलीय व्यवस्था को अपनाया गया है ।

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1. एक दलीय प्रणाली

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2. दो दलीय प्रणाली और

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3. बहुदलीय प्रणाली ।

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एक दलीय प्रणाली के अंदर सिर्फ एक ही राजनीतिक दल होता है । दो दलीय प्रणाली के अंदर दो राजनीतिक दल होते हैं और बहुदलीय प्रणाली के अंदर बहुत सारे दल होते हैं । चीन के अंदर एक दलीय प्रणाली को अपनाया गया है । ब्रिटेन और अमेरिका के अंदर दो दलीय प्रणाली को अपनाया गया है । भारत और फ्रांस के अंदर बहुदलीय प्रणाली को अपनाया गया है । भारत और ब्रिटेन दोनों ही लोकतांत्रिक देश हैं । ब्रिटेन के अंदर लोकतंत्र का विकास समय के साथ साथ धीरे-धीरे हुआ, लेकिन भारत में संविधान के बनने के तुरंत बाद लोकतंत्र की स्थापना हुई । ब्रिटेन के अंदर राजनीतिक दलों का जो विकास हुआ वह लोकतंत्र के उदय के साथ साथ हुआ । भारत में राजनीतिक दलों का विकास, राजनीतिक दलों की स्थापना आजादी से पहले ही हो चुकी थी । सन 1885 में कांग्रेस, 1906 मुस्लिम लीग, 1908 में हिंदू महासभा और 1925 में साम्यवादी दल बन चुका था । अब राजनीतिक दल सिर्फ लोकतांत्रिक देशों के अंदर ही नहीं पाए जाते ।। बहुत सारे गैर लोकतांत्रिक देशों में भी राजनीतिक दल पाए जाते हैं । लेकिन जिन देशों में लोकतंत्र होता है, वहां पर राजनीतिक दलों को बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है ।

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राजनीतिक दल का अर्थ (Meaning of Political Party)

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सबसे पहले हम जानते हैं कि राजनीतिक दल  किसे कहते हैं ?

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“लोगों का ऐसा समूह, जो एक जैसे विचार रखता है, मिलकर चुनाव लड़ता है और सत्ता प्राप्त करने का प्रयास करता है ।”

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राजनीतिक दल कहलाता है । राजनीतिक दल अपनी अलग-अलग नीतियां, अलग अलग कार्यक्रमों को जनता के सामने रखते है और उनका समर्थन प्राप्त करने की कोशिश करते हैं । ताकि वह बहुमत हासिल करके सरकार बना सके ।

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राजनीतिक दलों का महत्व (Importance of Political Parties)

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राजनीतिक दल बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है । उन्हें प्रजातंत्र में रीढ़ की हड्डी की तरह माना जाता है । यानी कि राजतंत्र के बिना हम प्रजातंत्र की या लोकतंत्र की कल्पना भी नहीं कर सकते । लोकतंत्र के अंदर राजनीतिक दल चुनाव लड़ते हैं और सरकार बनाने का प्रयास करते हैं । इसलिए लोकतंत्र में राजनीतिक दलों को बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि बिना राजनीतिक दलों के लोकतंत्र की स्थापना नहीं की जा सकती । राजनीतिक दलों के बिना कोई ऐसी व्यवस्था या संस्था नहीं बनाई जा सकती जो देश का शासन चला सके । राजनीतिक दलों के ना होने पर चुनावों को वैधानिक नहीं माना जा सकता । अब राजनीतिक दल चुनाव लड़के सत्ता प्राप्त करते हैं । जो दल बहुमत हासिल कर लेता है । वह सरकार बनाता है और बाकी दल विपक्ष की भूमिका निभाते हैं । अगर सरकार कुछ अनुचित करे तो विपक्ष सरकार को सही रास्ते पर लाने का प्रयास करते हैं । इसलिए राजनीतिक दलों को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है ।

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भारत और ब्रिटेन की दलीय व्यवस्था में तुलना (Comparison in India and Britain Party System)

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भारत और ब्रिटेन की जो दलिया व्यवस्था है – इन दोनों देशो की दलीय व्यवस्था में बहुत ज्यादा अंतर है जो सबसे पहला अंतर है, भारत और ब्रिटेन की दलीय व्यवस्था में वह दलीय पद्धति को लेकर । तुलना करते है भारत और ब्रिटेन की दलीय व्यवस्था में ।

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A.  दो दलीय बनाम बहुदलीय व्यवस्था (Two Parties vs Multiparty System)

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हालांकि ब्रिटेन के अंदर लोकतंत्र को अपनाया गया है । लेकिन दोनों की दलीय व्यवस्था बहुत अलग है । ब्रिटेन में कई दल होने के बावजूद भी दो दल बहुत महत्वपूर्ण होते है । जिन का प्रभुत्व बना रहता है । एक तरफ अनुदार दल (Conservative Party) है । दूसरी तरफ मजदूर दल Labour Party है । इन दोनों में से किसी ना किसी एक दल की सरकार जरूर बनती है । जबकि भारत के अंदर बहुदलीय प्रणाली को अपनाया गया है । बहुदलीय प्रणाली होने की वजह से किसी एक दल को आसानी से बहुमत नहीं मिल पाता । इसीलिए कई दल मिलकर सरकार बनाने का प्रयास करते हैं । तो हमारे यहां की जो सरकार बनती है, वह गठबंधन वाली सरकार होती है । तो भारत और ब्रिटेन की जो दलिया व्यवस्था में सबसे बड़ा अंतर है । वह दलीय प्रणाली को लेकर है । ब्रिटेन के अंदर दो दलीय प्रणाली को अपनाया गया है । और भारत के अंदर बहुदलीय प्रणाली को अपनाया गया है । हालांकि

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आपातकाल के बाद जब चुनाव हुए थे, तो 1977 में जनता पार्टी का निर्माण हुआ था । तो ऐसा लगने लगा था कि भारत के अंदर ही दो दलीय प्रणाली आ गई है । एक तरफ जनता पार्टी थी जिसके अंदर सभी विपक्षी दल शामिल थे । दूसरी तरफ कांग्रेस थी । लेकिन जनता पार्टी के पतन के बाद बहुदलीय प्रणाली दोबारा से जीवित हो चुकी थी । इसलिए भारत के अंदर बहुदलीय प्रणाली आज भी बनी हुई है ।

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B. राजनीतिक स्थिरता (Political Stability)

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दूसरा जो अंतर है दलीय व्यवस्था को लेकर वह है राजनीतिक स्थिरता । ब्रिटेन में दो दलीय प्रणाली होती है, इसीलिए किसी एक ना एक की सरकार जरूर बनती है । सरकार पूरे पूरे बहुमत वाली होती है इसीलिए सरकार स्थिर और मजबूत होती हैं । और इसी कारण ब्रिटेन के अंदर राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है । जबकि भारत के अंदर बहुदलीय प्रणाली की वजह से किसी भी एक दल को आसानी से बहुमत नहीं मिल पाता । ऐसे में कई दल मिलकर सरकार बनाते हैं और जो सरकार बनती है वह गठबंधन सरकार होती है । जो कि कमजोर होती है जिसकी वजह से राजनीतिक स्थिरता की समस्या पैदा हो जाती है ।

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C. दल बदल बनाम अनुशासन पार्टी (Discipline vs Defection Party)

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यह जो अंतर है वह अनुशासन को लेकर है । ब्रिटेन में दलों के अंदर बहुत ज्यादा कठोर अनुशासन देखने को मिलता है क्योंकि ब्रिटेन के अंदर 1885 से लेकर आज तक दल बदल की वजह से कोई सरकार ना बनी ना बिगड़ी । हालांकि जितने भी दल है या दलों के नेता हैं, वह अपना विरोध प्रकट कर सकते हैं या मतदान वाले दिन अनुपस्थित हो सकते हैं । लेकिन ज्यादातर दलों के नेता अपने दल के सिद्धांत के मुताबिक या वरिष्ठ नेता के मुताबिक ही कार्य करते हैं । इसीलिए दलों के अंदर अनुशासन बना रहता है । जबकि भारत के अंदर अवसरवादी व्यवस्था देखने को मिलती है । कई बार बहुत सारे नेता पैसे के लालच में आकर या पद पाने के लालच में आकर अपना दल बदल लेते हैं या फिर मतदान वाले दिन अनुपस्थित हो जाते हैं या अपने दल के खिलाफ ही वोटिंग कर देते हैं । अपने दल को छोड़कर दूसरे दल में शामिल हो जाते हैं और कभी-कभी आपसी विवाद इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि दलों में भी फूट पैदा हो जाती है । जैसे 1967 में भारत के अंदर कई बार दल बदल हुआ जिसकी वजह से बहुत सारी सरकारों पर प्रभाव पड़ा इसलिए 2003 में दलबदल को रोकने के लिए कानून बनाया गया ताकि दलबदल को खत्म किया जा सके या रोका जा सके ।

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D. विपक्ष की भूमिका (Roles of Oppositions)

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चौथा जो अंतर है वह विपक्ष की भूमिका को दिखाता है । ब्रिटेन के अंतर दो दल होने की वजह से एक दल की सरकार बनती है । तो जो विपक्ष बनता है वह बहुत ज्यादा शक्तिशाली और मजबूत होता है और प्रभावशाली होता है । और विपक्ष को भी सरकार का एक महत्वपूर्ण अंग माना जाता है । विपक्षी दल को महारानी के वफादार विरोधी के रूप में भी पुकारा जाता है तो इस तरीके से वहां का जो विपक्षी दल है वह बहुत शक्तिशाली है, जो सरकार पर अच्छी तरीके से नियंत्रण करता है । लेकिन भारत के अंदर बहुत सारे दल हैं और बहुदलीय प्रणाली की वजह से विपक्ष शक्तिशाली नहीं है और ना ही संगठित है । इसलिए विपक्ष बहुत बड़ी भूमिका नहीं निभा पाता है । कई बार यह देखने को आया है कि दल का हर सदस्य शोर मचाकर अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने का प्रयास करता है, जिससे सदन के अंदर अनुशासन नहीं बन पाता और साथ ही सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित या बंद करना पड़ता है । इससे सदन का समय बहुत ज्यादा खराब होता है और करोड़ों रुपया बर्बाद हो जाता है ।

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E. वैचारिक मतभेद (Ideological Differences)

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यह पांचवा अंतर है दलीय व्यवस्था को लेकर । वह है वैचारिक मतभेद । जैसा कि आप जानते हैं कि ब्रिटेन के अंदर दो दल हैं, अनुदार दल और मजदूर दल । अब ऐसा माना जाता है कि यह जो अनुदार दल है यह उच्च वर्गों का, जमीदारों का प्रतिनिधित्व करता है या पूंजीपतियों का प्रतिनिधित्व करता है । जबकि दूसरी दर मजदूर दल जो की मजदूरों का, किसानों का और मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है । परंतु भारत के अंदर वैचारिक मतभेद ना के बराबर देखने को मिलता है अब ज्यादातर Political Parties  सभी समस्याओं पर आपस में सहमत हैं यानी उनकी काफी सारी समस्याओं पर एक जैसी सहमति सामने आती है । जैसे कि सभी पार्टी आतंकवाद के खिलाफ हैं, वैश्वीकरण का समर्थन करते हैं, समाजवाद का समर्थन करते हैं, पर्यावरण को बचाने की सब की राय एक ही होती है । तो भारत के अंदर वैचारिक मतभेद ना के बराबर देखने को मिलता है ।

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 तो दोस्तों यह तो आपका भारत और ब्रिटेन की दलीय व्यवस्था में अंतर अगर आपको इस Chapter के Detail में Notes चाहिए तो आप हमारे Whatsapp वाले नंबर 9999338354 पर Contact कर सकते हैं ।

धन्यवाद

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