लोकतंत्र में मतदान व्यवहार

Voting Behaviour in Democracy

Hello दोस्तों ज्ञानउदय में आपका स्वागत है और आज हम बात करते हैं, राजनीति विज्ञान में लोकतंत्र के अंदर मतदान व्यवहार के बारे में । (Voting Behaviour in Democracy) इस Post में जानेंगे मतदान व्यवहार का अर्थ, विशेषताएं, मतदान व्यवहार से संबंधित धारणाएं और साथ ही साथ हम जानेंगे मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारक । लोकतंत्र में मतदान को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है । तो चलिए शुरू करते हैं आसान भाषा में लोकतंत्र के दृष्टिकोण से मतदान व्यवहार की प्रासंगिकता ।

मतदान व्यवहार का अर्थ

दुनियाभर में बहुत सारी शासन व्यवस्थाएं पाई जाती है । पर इन सभी शासन प्रणालियों में लोकतंत्र को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है । भारत में लोकतंत्र को सर्वाधिक वैधता प्राप्त करने वाली शासन प्रणाली के रूप में स्वीकार किया जा चुका है । लोकतंत्र की कामयाबी नागरिकों की सक्रियता और सचेतना पर निर्भर करती है । नागरिक राजनीति में प्रत्यक्ष रूप से अपनी भागीदारी निभा सकते हैं । सामाजिक प्राणी होने के कारण इस तरह नागरिक राजनीति से प्रभावित भी होते हैं तथा दूसरों को प्रभावित भी करते हैं । इसी तरह नागरिकों को राजनीति से संबंधित बहुत सारे कारक भी प्रभावित करते हैं । राजनीति से प्रभावित होकर नागरिक एक मतदाता के रूप में निर्णय लेते हैं, इसी को मतदान व्यवहार कहा जाता है ।

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मतदान व्यवहार मतदाता के मत (vote) देने तथा इसे प्रभावित करने वाले तत्वों के अध्ययन से है । मतदान व्यवहार का अध्ययन और विश्लेषण एक कठिन कार्य है, क्योंकि यह अलग-अलग तरह से बाह्य और आंतरिक कारकों से प्रभावित होता है । मतदाता अपने मतदान का प्रयोग करते समय आने कारकों से प्रभावित होता है ।

मतदान व्यवहार की परिभाषाएं

आइए अब जानते हैं, मतदान व्यवहार से संबंधित परीभाषाओं के बारे में । अलग-अलग विद्वानों ने अपने हिसाब से मतदान व्यवहार को लेकर अपनी अपनी राय व्यक्त की है ।

ग्रेवियाल ए आमण्ड के अनुसार-

“यह राजनीतिक उद्देश्य की तरफ निश्चित राजनीतिक अनुज्ञापन है । जैसे नेतृत्व, नीतियां और मुद्दे ।”

एच. एपिलवी के अनुसार-

“मतदान व्यवहार नागरिकों का सरकार से प्रत्यक्ष संबंध को दर्शाता है ।”

कार्ल जे. फ्रेडरिक के अनुसार-

“यह प्रजातांत्रिक शासन को वैधता प्रदान करने की प्रकिया है ।”

लोकतंत्र में सरकार को मतदाता द्वारा अपने पसंदीदा दल और उम्मीदवार को चुना जाता हैं । मतदान व्यवहार को चुनाव और निर्वाचन प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण पहलू माना जाता है । मतदाता अपनी सोच के आधार पर निर्णय करता है कि किस सोच और विचारधारा के लोग उम्मीदवार को बेहतर बना सकते हैं । इस प्रकार लोकतंत्र में मतदाता का सामूहिक विवेक अपने विकास के लिए अग्रसर होता है ।

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सामान्यता मतदान व्यवहार का अर्थ यह माना जाता है कि मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते समय किन किन भावनाओं से प्रेरित होता है और उसके मस्तिष्क में किन-किन बातों का प्रभाव पड़ता है ।

मतदान व्यवहार संबंधी सामान्य धारणा

आइए अब उन सामान्य और मुख्य धारणाओं के बारे में बात करते हैं, जो मतदान व्यवहार से संबंध रखती है । मतदाताओं को चुनावों के प्रति उदासीन माना जाता है । चुनावी परिणाम की हार जीत में लाखों में अंतर होने के कारण मतदाता सोचते हैं कि उनके एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा । कई लोग चुनावों में रुचि नहीं लेते और वोट देने भी नहीं जाते, इससे मतदान का प्रतिशत कम रहता है । मतदाता को धन, बल आदि द्वारा प्रभावित किया जाता है । बहुत सारे मतदाता उम्मीदवार की छवि, शिक्षा और मनोवृत्ति को छोड़कर धर्म और जाति की नाम पर वोट देते हैं ।

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मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारक

आइए अब बात करते हैं, मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले ऐसे तत्व है, जो व्यक्ति में सोच को बदलते हैं । आइए हम लोकतंत्र में उन कारको के बारे में और उन लोगों की सोच के बारे में बात करते हैं ।

लोकतंत्र को भारत में विशेष स्थान प्राप्त है और भारत का लोकतंत्र सबसे बड़ा लोकतंत्र है । इस बड़े लोकतंत्र में मतदाताओं का मतदान व्यवहार अलग अलग तरीके से और अलग-अलग तत्वों से प्रभावित होता है । इस तरह दो मुख्य कारण हैं ।

1 सामाजिक आर्थिक कारण

2 राजनीतिक कारण

राजनीतिक आर्थिक कारणों में मुख्यता शिक्षा, धर्म, जाती और संप्रदाय, परिवार एवं नातेदारी,भाषा आदि को शामिल किया है ।

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राजनीतिक कारणों में दलीय संगठन, लोकमत, राजनीतिक दलों की नीतियों, राजनीतिक मुद्दों, स्थानीय सत्ता की संरचना आदि को सम्मिलित किया जाता है ।

मतदान के लिए हर लोकतांत्रिक राज्य में एक निर्धारित आयु पूरी होने पर सभी वयस्कों को चुनाव में वोट देने का अधिकार होता है । व्यक्ति बिना किसी जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभाव से अपने इस अधिकार का प्रयोग करते हैं । वोट डालने की प्रक्रिया को ही मतदान कहा जाता है । शासन चलाने के लिए अपने पसंद के प्रत्याशी को चुनने का अधिकार ही नागरिकों का मताधिकार कहलाता है । लोकतांत्रिक व्यवस्था वाले देशों में मतदान द्वारा एक निश्चित अवधि के लिए अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं और यह प्रतिनिधि सरकार बनाकर नागरिकों की भावना के अनुसार देश का शासन चलाते हैं ।

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मतदान के समय हर व्यक्ति के सोच अलग-अलग हो सकते हैं । कभी-कभी वह अपने समूह के हितों की रक्षा के लिए या फिर किसी उम्मीदवार के प्रति अपने लगाव के कारण या फिर कभी वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी आस्था व निष्ठा व्यक्त करने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं ।

इस तरह मतदान व्यवहार के लिए किसी एक कारण को महत्वपूर्ण नहीं माना जा सकता । क्योंकि व्यक्ति की सोच इस तरह सामुहिक बातों का असर भी होता है । इन सब के कारण ही मतदान व्यवहार का अध्ययन विश्लेषण करना कठिन कार्य माना जाता है । परन्तु एक लोकतांत्रिक देश के लिए यही महत्वपूर्ण कारक मने जाते हैं ।

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तो दोस्तो ये था मतदान व्यवहार का अर्थ, परिभाषा और मतदान व्यवहार को प्रभावित करने वाले कारक । अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें । तब तक के लिए धन्यवाद !!

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