राष्ट्रीय आय तथा सम्बंधित समुच्चय

Hello दोस्तों, Gyanuday में आपका फिर से स्वागत है । आज हम आपके लिए लाए हैं, 12 Class Macro Economics समष्टिगत अर्थशास्त्र का दूसरा अध्याय “राष्ट्रीय आय तथा सम्बंधित समुच्चय “ (National Income Accounting) । Chapter को बहुत ही आसान भाषा में समझाया गया है, जो कि सभी Students को आसानी से समझ आ जायेगा । (CBSE macroeconomics class 12) इस अध्याय को पढ़ने के बाद आप समझ पाएँगे ।

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Table of contents

1.0 राष्ट्रीय आय की अवधारणा (concept of National Income)

2.0 एक देश की घरेलु सीमा से आप क्या समझते हैं ?

3.0 घरेलु आय (Domestic Income) का राष्ट्रीय आय (National Income) में परिवर्तन कैसे किये जाता ?

4.0 घरेलु उत्पाद (Domestic Product) की सकल तथा शुद्ध अवधारणाऐं ?

5.0 राष्ट्रीय आय से सम्बंधित सम्मुचयों को वर्णित कीजिये ?

6.0 मौद्रिक GDP तथा वास्तविक GDP क्या है ?

7.0 GDP तथा कल्याण को परिभाषित करें ?

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राष्ट्रीय आय:-

राष्ट्रीय आय एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान एक देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कारक आय कुल जोड़ है |

(A)सामान्य निवासी:-

एक ऐसा व्यक्ति जो एक देश में एक वर्ष की अवधि के दौरान निवास करता है तथा उसकी आर्थिक रुचि उस देश में होती है तथा अपने आर्थिक सौदे (उत्पादन, उपभोग, निवेश सम्बंधित सौदे) उसी देश में एक महत्वपूर्ण पैमाने पर करता है, वह उस देश का सामान्य निवासी कहलाता है |

इस विषय में निम्नलिखित अवलोकन महत्वपूर्ण है:

I. सामान्य निवासी के अंतर्गत व्यक्ति तथा संस्थाएं दोनों ही आते हैं

II. यह ज़रूरी नहीं है की एक व्यक्ति एक देश को सामान्य निवासी है तो वह उस देश का नागरिक हो| अर्थात एक व्यक्ति किसी देश का नागरिक होने के बाद भी किसी अन्य देश का सामान्य नागरिक हो सकता है|

III. एक देश में स्थित अंतर्राष्ट्रीय संघठनों (जैसे: WHO या IMF) को उस देश का सामान्य निवासी नहीं समझा जाता| पर इनमे काम करने वाले भारतियों को सामान्य निवासी समझा जाएगा|

IV. निम्नलिखित व्यक्तियों को देश का सामान्य निवासी नहीं समझा जाता:

a). मनोरंजन, चिकित्सा, शिक्षा, कांफ्रेरेंस, खेल-कूद के लिए आय सैलानी

b). व्यावसायिक यात्री, जहाजों के कर्मीदल के सदस्य, मौसमी श्रमिक

c). ऐसे विदेशी जो गैर निवासी उपक्रमों के कर्मचारी हों और मशीनों की स्थापना करने के लिए आय हैं |

V. सीमा पर काम करने वाले ऐसे व्यक्ति जो रोज़ सीमाओं को प्रतिदिन या नियमित रूप से पर करते हैं वे ऐसे देश के नागरिक होंगे जिस देश में वे रहते हैं न की उस देश के जिस देश में काम करते हैं|

VI. विदेशी पदाधिकारी, कूटनीतिज्ञ तथा सशस्त्र सेना के सदस्य को उस देश के सामान्य निवासी माना जाता है, जिसके वे निवासी होते हैं न की उस देश के जिसमे वो कम करते हैं|

(B)कारक आय:- आय को कारक आय(भुगतान) तथा हस्तांतरण आय(भुगतान) में वर्गीकृत किया जा |

कारक आय:- कारक सेवाओं या उत्पादन के कारकों (भूमि, श्रम, पूंजी, उध्यम्वृति) को परिवार से भाड़े पर लिया (या खरीदा) जाता है तथा वह अपनी सेवाओं के बदले में जो भुगतान प्राप्त करते हैं उसे कारक आय या कारक भुगतान कहा जाता है |

NOTE: राष्ट्रीय आय अनुमान लगाने के लिए इन्हीं कारक आयों को शामिल किया जाता है इसमें हस्तांतरण आय शामिल नहीं होती| जैसे:- दान या अनुदान आदि |

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घरेलु सीमा:-

अर्थशास्त्र में घरेलु सीमा से अभिप्राय केवल देश की सीमा के राजनीतिक भू-भाग से ही नहीं है बल्कि इसमें निम्नलिखित को सम्मिलित किया जाता है:-

(i). राजनीतिक सीमाओं का भू-भाग

(ii). राजनीतिक सीमाओं की सामुद्रिक सीमा

(iii). देश के निवासियों द्वारा विश्व के विभिन्न भागों में चलाये जाने वाले वायुयान तथा जलयान (उदाहरण: कनाडा व इंग्लैंड के बीच चलने वाले(Air India) यात्री हवाई जहाज़ भारत की घरेलु सीमा में आते हैं)

(iv). मछली पकड़ने वाली नौकाएँ, तेल व प्राकृतिक गैस यान तथा तैरते हुए प्लेटफोर्म जो अंतर्राष्ट्रीय जल सीमा में देश के निवासियों द्वारा चलाए जाते हैं| (v). एक देश का विदेश में स्थित दूतावास, वाणिज्य दूतावास तथा सैनिक प्रतिष्ठान Example: अमेरिका में भारतीय दूतावास भारत की सीमा का एक अंग है तथा भारत में अमेरिका का दूतावास अमेरिका की घरेलु सीमा का अंग है |

राष्ट्रीय आय (National Income) एक लेखा वर्ष में किसी देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कारक आय का जोड़| घरेलु आय (Domestic Income) एक लेखा वर्ष में एक देश की घरेलु सीमा में सृजित की जाने वाली कारक आय का जोड़ है (इसमें गैर-निवासियों द्वारा अर्जित की जाने वाली आय को भी शामिल किया जाता है तथा शेष-विश्व में देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कारक आय को नहीं जोड़ा जाता) यदि इसमें शेष-विश्व में अर्जित सामान्य निवासियों की कारक आय को जोड़ा जाए तथा गैर-निवासियों की कारक आय को घटा दिया जाए तो राष्ट्रीय आय (National Income) प्राप्त होती है |

राष्ट्रीय आय

= घरेलु आय + शेष विश्व में सामान्य निवासियों द्वारा आर्जित कारक आय देश की घरेलु सीमा में अर्जित गैर निवासियों की कारक आय

अथवा

राष्ट्रीय आय=घरेलु आय+विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय

अथवा राष्ट्रीय आय=घरेलु आय-विदेशों को दी गई शुद्ध कारक आय

घरेलु आय को सकल घरेलु उत्पाद (GDP) तथा शुद्ध घरेलु उत्पाद (NDP) के रूप में मापा जा सकता है| इन दोनों के बीच के अंतर को मुल्यह्रास कहते हैं |

सकल घरेलु उत्पाद (GDP) में मूल्यह्रास शामिल होता है, तथा शुद्ध घरेलु उत्पाद (NDP) में मूल्यह्रास शामिल नहीं होता |

GDP=NDP+मूल्यह्रास

NDP=GDP-मूल्यह्रास

                   इसी प्रकार:-

GNP=NNP+मूल्यह्रासNNP=GNP-मूल्यह्रास

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राष्ट्रीय आय के विभिन्न समुच्चयों में परस्पर सम्बन्ध पाया जाता है, इनके सात उपखंडों को निम्न रूप से बांटा गया है:-

(i). GDPMP, NDPMP, GDPFC, NDPFC

(ii). GNPMP, NNPMP, GNPFC, NNPFC

(iii).  राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (सकल तथा शुद्ध)

(iv). निजी क्षेत्र को शुद्ध घरेलु उत्पाद से प्राप्त कारक आय

(v).  निजी आय

 (vi). वैयक्तिक आय

 (vii). वैयक्तिक प्रयोज्य आय

(i). GDPMP, NDPMP, GDPFC, NDPFC.

GDPMP बाज़ार कीमत पर सकल घरेलु उत्पाद

एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान देश की घरेलु सीमा में सभी उत्पादकों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं में की गई मूल्यवृद्धि का जोड़ जिसमें मूल्यह्रास भी शामिल होता है|  NDPMPèबाज़ार कीमत पर शुद्ध घरेलु उत्पाद:- एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान देश की घरेलु सीमा में सभी उत्पादकों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं में की गई मूल्यवृद्धि का जोड़ जिसमें मूल्यह्रास शामिल नहीं होता है |

   GDPFC कारक लागत पर सकल घरेलु उत्पाद:- एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान एक देश की घरेलु सीमा में कारकों को उनकी सेवा के बदले में किया जाने वाले भुगतानों का जोड़ जिसमे मूल्यह्रास भी शामिल होता है |  

NDPFC कारक लागत पर शुद्ध घरेलु उत्पाद:- एक लेखा वर्ष की अवधि के दौरान एक देश की घरेलु सीमा में कारकों को उनकी सेवा के बदले में किया जाने वाले भुगतानों का जोड़ जिसमे मूल्यह्रास शामिल नहीं होता है |

(ii). GNPMP, NNPMP, GNPFC, NNPFC.

GNPMP बाज़ार कीमत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद:- GDPMP तथा विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय का जोड़ |

    NNPMP बाज़ार कीमत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद:- NNPMP तथा विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय का जोड़ |

      NNPFC कारक लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद:- NDPFC तथा विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय का जोड़|

      GNPFC कारक लागत पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद:- GDPFC तथा विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय का जोड़ |

(iii). राष्ट्रीय प्रयोज्य आय (सकल तथा शुद्ध)

इससे अभिप्राय उस आय से है जो किसी देश के निवासियों को सभी स्रोतों से प्राप्त होती है यह बाज़ार कीमत पर शुद्ध आय तथा शेष विश्व से प्राप्त शुद्ध चालू हस्तांतरण का जोड़ होता है

राष्ट्रीय प्रयोज्य आय=राष्ट्रीय आय(NNPFC)+शुद्ध अप्रयत्क्ष कर+शेष विश्व से प्राप्त चालू हस्तान्त्रण

उपरोक्त दिखाई गई राष्ट्रीय प्रयोज्य आय, शुद्ध राष्ट्रीय प्रयोज्य आय है यदि इसमें चालू पुन:स्थापन लागत(समस्त अर्थव्यवस्था के स्तर पर मूल्यह्रास) को जोड़ा जाए तो सकल राष्ट्रीय प्रयोज्य आय प्राप्त होती है |

नोट: राष्ट्रीय प्रयोज्य आय से अभिप्राय शुद्ध राष्ट्रीय प्रयोज्य से है |

(iv). निजी क्षेत्र को शुद्ध घरेलु उत्पाद से प्राप्त आय

घरेलु आय(NDPFC) का वह भाग जो निजी क्षेत्र को प्राप्त होता है|घरेलु आय(NDPFC) में निजी क्षेत्र तथा सार्वजानिक क्षेत्र द्वारा अर्जित की जानी वाली आय शामिल होती हैं यदि इसमें से सार्वजानिक आय के भाग को घटा दिया जाए तो निजी क्षेत्र को शुद्ध घरेलु उत्पाद से प्राप्त होने वाली आय प्राप्त होती है |

निजी क्षेत्र को शुद्ध घरेलु उत्पाद से प्राप्त आय = NDPFC – सरकारी विभागीय उद्यमों की संपत्ति तथा उद्द्य्मव्रत्ति से प्राप्त आय  – गैर विभागीय उद्यमों की बचत

(v). निजी आय

वह आय जो निजी क्षेत्र को सभी स्रोतों से प्राप्त होती है निजी आय कहलाती है | निजी आय में कारक आय तथा हस्तांतरण आय दोनों को शामिल किया जाता है | इसे निम्न प्रकार निकाला जाता है:-

निजी आय= निजी क्षेत्र को शुद्ध घरेलु उत्पाद से प्राप्त आय + विदेशों से प्राप्त शुद्ध कारक आय + शेष विश्व से प्राप्त चालू हस्तांतरण + सरकार से प्राप्त वर्तमान हस्तांतरण + राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज |

नोट:- राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज को निजी आय में शामिल किया जाता है क्यूंकि यह उस ऋण(उधार) के बदले दिया जाता है जिस ऋण को सरकार ने निजी क्षेत्रों से प्राप्त किया था |

(vi). वैयक्तिक आय.

परिवारों को सभी स्रोतों से प्राप्त आय के जोड़ को वैयक्तिक आय कहा जाता है | अन्य शब्दों में व्यक्तियों तथा परिवारों को सभी स्रोतों से प्राप्त कारक आय तथा हस्तांतरण आय का जोड़ वैयक्तिक आय कहलाता है |

वैयक्तिक आय=निजी आय – अवितरित लाभ (निगम बचत) – निगम कर

(vii). वैयक्तिक प्रयोज्य आय

वैयक्तिक आय का ऐसा भाग जिसको परिवार अपनी इच्छानुसार खर्च करने या बचत करने में में स्वतंत्र होते हैं| अर्थात:- वैयक्तिक आय का वह भाग जो व्यक्तियों तथा परिवारों को सभी स्रोतों से प्राप्त होती है तथा सभी प्रकार के सरकारी करों से मुक्त होती है |

वैयक्तिक प्रयोज्य आय=वैयक्तिक आय – प्रत्यक्ष वैयक्तिक कर – सरकारी विभागों की विविध प्राप्तियां(परिवारोंपर शुल्क,जुर्माना आदि)

वैयक्तिक प्रयोज्य आय = परिवार क्षेत्र का उपभोग + परिवार क्षेत्र की बचत

मौद्रिक GDP:-

जब GDP को चालू वर्ष की कीमतों का प्रयोग करके निकाला जाता है| एक लेखा वर्ष के दौरान देश की घरेलु सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं के बाज़ार मूल्य को मौद्रिक GDP कहा जाता है इसका अनुमान चालू कीमतों पर लगाया जाता है |

मौद्रिक GDP=Q×P

(P= लेखा वर्ष के दौरान प्रचलित कीमतें)

मौद्रिक GDP में वृद्धि उत्पादन की मात्रा या कीमत में वृद्धि के कारण होती है| या तब भी हो सकती है जब उत्पादन स्थिर रहे |

वास्तविक GDP:- जब GDP को स्थिर कीमतों का प्रयोग करके ज्ञात किया जाता है | एक लेखा वर्ष के दौरान देश की घरेलु सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं तथा सेवाओं का बाज़ार मूल्य जिसे स्थिर कीमतों के आधार पर ज्ञात किया जाता है वास्तविक GDP कहलाता है |

वास्तविक GDP=Q×P*

(P* = आधार वर्ष के दौरान प्रचलित कीमतें) वास्तविक GDP में वृद्धि केवल तभी संभव है जब मात्रा को बढाया जाए| क्यूंकि कीमतें स्थिर रहती हैं |

GDP को लोगों के कल्याण का सूचक माना जाता है, GDP में वृद्धि से लोगों के कल्याण के स्तर में भी वृद्धि होती है, GDP जितनी अधिक होगी उतनी ही देश की संवृद्धि तथा विकास होगा, क्यूंकि GDP का बढना अर्थव्यवस्था में विकास को दर्शाता है| GDP में वृद्धि से संवृद्धि का एक सदाचारी चक्र चलता है |

अगर आपको इस चैप्टर के Detailed में Notes चाहिये तो आप हमारे Whatsapp 9654600866 पर contact कर सकते हैं ।

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