राष्ट्रपति की शक्तियां व निर्वाचन प्रणाली

Powers and Selection Procedure of President of India

Hello दोस्तों ज्ञानउदय में आपका एक बार फिर स्वागत है और आज हम जानेंगे भारत के राष्ट्रपति  की शक्तियों के बारे में  और उनकी निर्वाचन प्रणाली के बारे में । साथ ही साथ हम बताएंगे राष्ट्रपति की योग्यताओं के बारे में, उनके कार्यकाल के बारे में, वेतन और भत्तों के बारे में ।

अक्सर Exams में प्रश्न पूँछ लिया जाता है कि भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन किस प्रकार होता है ? तथा राष्ट्रपति की शांति कालीन शक्तियों व स्थिति का वर्णन कीजिए ? तो जान लेते है भारत के सर्वोच्च पद से सम्बंधित व्यक्ति की शक्तियों और उसके चुनाव के बारे में ।

परीचय

भारत में संघीय कार्यपालिका के प्रधान को राष्ट्रपति कहा जाता है । भारत में केंद्र की समस्त कार्यपालिका की शक्तियां राष्ट्रपति में निहित है । परंतु भारत में संसदीय कार्य प्रणाली होने के कारण राष्ट्रपति कार्यपालिका का वास्तविक प्रधान ना होकर केवल औपचारिक प्रधान है । भारत के मंत्री मंडल वास्तविक कार्यपालिका है । जो समस्त कार्यपालिका की शक्तियों का उपयोग करती है । तथा अपने प्रत्येक कार्य के लिए संसद के प्रति उत्तरदाई होती हैं, क्योंकि भारत में राष्ट्रपति को वास्तविक शक्तियां प्राप्त नहीं है । इसलिए उसका निर्वाचन भी अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है । राष्ट्रपति का पद सम्मान, गौरव और प्रतिष्ठा का प्रतीक है । वह राष्ट्र की एकता का प्रतीक है, तथा देश का प्रथम नागरिक होता है ।

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1 योग्यताऐं

सबसे पहले हम बात करते हैं, राष्ट्रपति की योग्यताओं के बारे में जो भी निम्नलिखित हैं ।

i वह भारत का नागरिक हो ।

ii उसकी आयु 35 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए ।

iii वह किसी सरकारी लाभ के पद पर कार्यरत ना हो । उपराष्ट्रपति, राज्यपाल और मंत्रियों को राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए त्यागपत्र नहीं देना पड़ता, क्योंकि इनके पद को लाभप्रद नहीं माना गया है । परंतु राष्ट्रपति चुने जाने के पश्चात उनका उपरोक्त रिक्त माना जाएगा ।

iv वह लोकसभा का सदस्य चुने जाने की योग्यता रखता हो ।

v राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार द्वारा भरा गया नामांकन पत्र निर्वाचक मंडल के कम से कम 50 सदस्यों द्वारा प्रस्तावित व अनुमोदित होना चाहिए तथा उसे ₹15,000 जमानत के रूप में जमा करने कराने होते हैं । ऐसा इसलिए किया जाता है कि कोई अनावश्यक प्रत्याशित चुनाव में ना खड़ा हो सके ।

2 कार्यकाल

राष्ट्रपति का अधिकतम कार्यकाल 5 वर्ष नियुक्त किया गया है । वह दोबारा भी चुनाव लड़ सकता है । यदि मृत्यु हो जाए, त्यागपत्र देने या महाभियोग द्वारा हटाए जाने की स्थिति में । 6 माह के अंदर अंदर नए राष्ट्रपति का चुनाव दोबारा 5 वर्ष के लिए होता है । कार्यकाल समाप्त होने के बाद राष्ट्रपति अपने उत्तराधिकारी (अगले राष्ट्रपति के पद संभालने तक) अपने पद पर बना रहता है ।

3 वेतन व भत्ते

वर्तमान समय में भारत के राष्ट्रपति को ₹5,00,000 मासिक वेतन प्राप्त होता है । सन 2017 तक राष्ट्रपति को ₹1,50,000 प्रति माह मिलते थे, जो कि और दूसरे bureaucrat से कम थे । इसके अलावा राष्ट्रपति को निशुल्क चिकित्सा, वाहन व रहने के लिए राष्ट्रपति भवन मिलता है । इसके अतिरिक्त अवकाश ग्रहण करने के पश्चात 1,50,000 मासिक पेंशन और राष्ट्रपति Spouse को ₹30,000 प्रति माह निजी सचिवालय के लिए मिलता है ।

4 निर्वाचन प्रणाली

राष्ट्रपति का निर्वाचन अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है । जिसमें संसद के दोनों सदनों एमपी (M. P. Member’s of Parliament) और राज्य की विधानसभाओं के सदस्य एमएलए (MLA- Member of Legislative Assembly) भाग लेते हैं । राष्ट्रपति का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से गुप्त मतदान के द्वारा होता है । इस प्रणाली में प्रत्येक मतदाता अपने मत पत्र पर प्रत्येक उम्मीदवार को अपनी पसंद के अनुसार प्रथम द्वितीय,द्वितीय और तृतीय वरीयता (Preference) देता है । जिसके कारण उसकी पहली पसंद का प्रत्याशी निर्वाचित ना होने पर उसका मत द्वितीय पसंद के प्रत्याशी को प्राप्त हो जाता है ।

मतदान से पहले निर्वाचक मंडल के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य उसके राज्य की जनसंख्या के आधार पर निकाला जाता है । इस प्रकार संसद के प्रत्येक सदस्य के मत का मूल्य भी, समस्त विधानसभाओं के सदस्यों के मत के मूल्य को समस्त संसद की कुल सदस्यों की संख्या से भाग देकर निकाला जाता है । इस प्रकार संसद के सदस्यों के मतों का कुल मूल्य विधानसभा के सदस्य के मतों के उन मूल्यों के बराबर होता है ।

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राष्ट्रपति के चुनाव में विजय प्राप्त करने के लिए उम्मीदवार को 50% से अधिक मत प्राप्त करने होते हैं । मतों की गणना करने पर यदि किसी भी उम्मीदवार को प्रथम पसंद के 50% वोट प्राप्त नहीं हुए । तो सबसे कम मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवार के मतों की दूसरी पसंद के आधार पर वितरित कर दिया जाता है । यदि फिर भी किसी उम्मीदवार को निश्चित संख्या में मत प्राप्त ना हो, तो वह प्रक्रिया दोबारा अपनाई जाती है और यह प्रकीया उस समय तक चलती रहती है, जब तक कि किसी एक उम्मीदवार को निश्चित मत प्राप्त नहीं हो जाते । इस प्रक्रिया के पश्चात जिस उम्मीदवार को निश्चित मत प्राप्त हो जाते हैं । उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है और विजयी उम्मीदवार को भारत का सर्वोच्च न्यायाधीश राष्ट्रपति के पद की शपथ दिलाता है ।

राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित कोई भी विवाद सीधे उच्चतम न्यायालय में निर्वाचक मंडल के 20 सदस्यों के हस्ताक्षर सहित भेजा जा सकता है तथा विवाद के संबंध में उच्चतम न्यायालय का फैसला अंतिम माना जाता है ।

5 महाभियोग

संविधान के अनुच्छेद 61 के अनुसार यह व्यवस्था की गई है कि संविधान का उल्लंघन करने पर राष्ट्रपति पर संसद महाभियोग चला सकती है । महाभियोग का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है । इसके लिए उस संसद के 1/4 (एक चौथाई) यानी कि 25% सदस्यों के हस्ताक्षर का नोटिस राष्ट्रपति को भेज दिया जाना आवश्यक है । यदि वह सदन इस प्रस्ताव को 2/3 (दो तिहाई)बहुमत से पारित कर दे, तो उस प्रस्ताव को दूसरे सदन में भेज दिया जाता है । जहां उसकी जांच पड़ताल होती है । यदि वह सदन भी महाभियोग का प्रस्ताव 2/3 बहुमत से पारित कर दे तो, राष्ट्रपति को तुरंत ही अपदस्त मान लिया जाता है । महाभियोग के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती ।

राष्ट्रपति की शांति कालीन शक्तियां

भारत के राष्ट्रपति को व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं । जिन्हें शांति कालीन और आपातकालीन दो भागों में बांटा जा सकता है । राष्ट्रपति की शांति कालीन शक्तियां निम्नलिखित हैं ।

अ) कार्यपालिका संबंधी शक्ति

भारत में संघ की समस्त कार्यपालिका संबंधी शक्तियां राष्ट्रपति में निहित है । अर्थात संसद द्वारा बनाए गए कानूनों को लागू करने की शक्ति राष्ट्रपति को प्राप्त है । शासन के समस्त निर्णय राष्ट्रपति के नाम से ही लिए जाएंगे ।

कार्यपालिका का प्रमुख होने के कारण वह लोकसभा में बहुमत प्राप्त करने वाले दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है । तथा प्रधानमंत्री के सहयोग और परामर्श से मंत्रिमंडल का गठन करता है तथा सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियां राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती हैं । वह प्रधानमंत्री और मंत्रियों के अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति करने और CAG (Comptroller Auditor General) को नियुक्त करने का अधिकार रखता है । वित्त आयोग, निर्वाचन आयोग, अनुसूचित जनजाति और जनजाति आयोग आदि की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है । केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासन की समस्त जिम्मेदारी राष्ट्रपति पर ही होती है ।

ब) विधायी शक्ति

विधायी क्षेत्र में भी राष्ट्रपति को व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं । वह संसद का अंतिम अंग होता है । वह संसद के दोनों सदनों के अधिवेशन को बुलाता है । वह स्थगित भी करता है तथा दोनों सदनों में किसी विषय पर मतभेद होने पर वह संयुक्त अधिवेशन बुलाता है । राष्ट्रपति को संसद में भाषण देने और अपना संदेश पहुंचाने का अधिकार होता है । वह लोकसभा में दो तथा राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकता है ।

राष्ट्रपति लोकसभा को समय से पहले भी भंग कर सकता है । कुछ विधेयकों को संसद में प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होती है । कोई भी विधेयक दोनों सदनों में पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेज दिया जाता है।  राष्ट्रपति असाधारण विधायक को दोबारा से विचार करने के लिए संसद में वापस भेज सकता है । जिस पर यदि दोनों सदन दोबारा अपनी स्वीकृति प्रदान कर दें तो, राष्ट्रपति हस्ताक्षर करने के लिए बाध्य होता है । अर्थात विधायी क्षेत्र में राष्ट्रपति को आंशिक या विलंबकारी शक्तियां ही प्राप्त होती हैं । इसके अलावा यदि संसद का अधिवेशन ना चल रहा हो तो राष्ट्रपति अध्यादेश भी जारी कर सकती है ।

स) वित्तीय शक्ति

राष्ट्रपति को व्यापक वित्तीय शक्तियां प्राप्त हैं । देश के संपूर्ण वित्त पर राष्ट्रपति का नियंत्रण पाया जाता है । कोई भी वित्त विधेयक राष्ट्रपति की अनुमति के बिना लोकसभा में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता । प्रति वर्ष वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाने वाला वार्षिक बजट राष्ट्रपति के नाम से ही पेश किया जाता है । वित्त आयोग की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है तथा सीएजी की नियुक्ति पर भी राष्ट्रपति का नियंत्रण पाया जाता है । राष्ट्रपति संसद की अनुमति के बिना आकस्मिक निधि से खर्च कर सकता है । इस प्रकार राष्ट्र के संपूर्ण वित्त पर राष्ट्रपति का नियंत्रण पाया जाता है ।

द) न्यायिक शक्ति

भारत में समस्त न्यायिक शक्तियां न्यायपालिका में निहित है । परंतु कुछ न्यायिक शक्तियां राष्ट्रपति को भी प्राप्त हैं । वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है तथा अन्य कर्मचारियों व प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति भी करता है । वह दंड में परिवर्तन कर सकता है तथा किसी की सज़ा को माफ़ भी कर सकता है । परंतु क्षमादान की शक्ति का प्रयोग निम्न परिस्थितियों में ही किया जा सकता है

– अपराधी केंद्रीय कानूनों के प्रति दंडित हो ।

– अपराधी को मृत्यु की सजा सुनाई गई हो ।

– दंड किसी सैनिक न्यायालय द्वारा दिया गया हो ।

ई) सैनिक शक्ति

भारत में राष्ट्रपति को सैनिक शक्तियां भी प्राप्त हैं । वह भारत के जल, थल और वायु । तीनों सेनाओं का सर्वोच्च सेनापति होता है । वह सेनाओं के अध्यक्षों को नियुक्त करता है तथा तीनों सेनाओं के अन्य अधिकारियों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति के नाम पर की जाती है । युद्ध और शांति की घोषणा राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है तथा युद्ध में सेना को भेजने की अनुमति भी राष्ट्रपति के द्वारा ही की जाती है ।

फ़) विदेशी शक्ति

भारत के राष्ट्रपति को विदेशों से संबंधित व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं । क्योंकि सैद्धांतिक रूप से वह कार्यपालिका का प्रधान होता है । इसलिए उसे विदेशों से संधियां व समझौते करने का अधिकार भी प्राप्त है । परंतु इसमें संसद की स्वीकृति आवश्यक है । वह विदेशों में भारत के राजदूतों या प्रतिनिधियों की नियुक्ति करता है तथा अन्य देशों के राजदूतों या प्रतिनिधियों का स्वागत करता है ।

राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के बारे में

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