राजनीति सिद्धांत- Political Theory

राजनीति सिद्धांत-एक परिचय (An introduction of Political Theory)

इसको पढ़कर हम जानेंगे कि राजनीति किसे कहते हैं ।

राजनीति का अध्ययन हम सबके लिए क्यों जरूरी है ।

राजनीति के सिद्धांत को किस तरीके से व्यवहार में लाया जाता है ।

और व्यवहार में कौन-कौन सी समस्याएं आती हैं ।

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राजनीति का अर्थ  Meaning of Political Science

सबसे पहले हम जानते हैं कि राजनीति किसे कहते हैं ? राजनीति को अधिकतर नकारात्मक अर्थों में ही जाना जाता है । राजनीति का नकारात्मक अर्थ है ।

“अच्छे और बुरे सभी साधनों का इस्तेमाल करके अपनी आवश्यकता और उद्देश्यों को पूरा करना ।”  

इस वजह से ही राजनीति को कई हिस्सों में बांटा जाने लगा है । जैसे घरेलू राजनीति, स्कूल की राजनीति, कॉलेज की राजनीति, मोहल्ले की राजनीति, गांव की राजनीति, शहरों की राजनीति आदि । इस तरीके से झूठ बोलकर, धोखा देकर या बेईमानी कर के अपने उद्देश्यों को पूरा करना ही राजनीति कहलाता है । लेकिन यह राजनीति का असली मतलब नहीं है ।

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“राजनीति का असली मतलब है निर्णय लेने की प्रक्रिया । “

निर्णय लेने की प्रक्रिया सार्वभौमिक होती है यानी सभी जगह एक समान होती है ।

प्राचीन काल में निर्णय लेने की प्रक्रिया के अंदर कुछ सीमित लोग ही भाग लेते थे । जैसे कि राजतंत्र के अंदर राजा और राज घराने के लोग, कुलीन तंत्र के अंदर कुलीन वर्ग के लोग, सैनिक शासन के अंदर सैनिक अधिकारी और बड़े बड़े अधिकारी ही राजनीतिक निर्णय के अंदर भाग लेते थे । यानी Participate करते थे ।

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लेकिन 20 वी शताब्दी में ज्यादातर देशों में लोकतंत्र को अपनाया जाने लगा । लोकतंत्र के आने की वजह से निर्णय लेने की प्रक्रिया सार्वभौमिक हो गई है । क्योंकि सभी लोगो को वोट डालने का अधिकार दिया गया है, जिससे जनता को भी निर्णय लेने की प्रक्रिया के अंदर अप्रत्यक्ष (Indirect) तरीके से Participate करने का मौका मिलता है।

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राजनीति सिर्फ वह नहीं होती जो राजनेता करते हैं । हालांकि नेताओं के जरिए अक्सर यह कहा जाता है कि एक तरीके की जनसेवा है मगर ऐसे नेताओं की तादात बहुत कम है जो जनता की सेवा के लिए राजनीति करते हैं या राजनीति में आते हैं । ज्यादातर लोग पैसा Power या शोहरत पाने के लिए राजनीति के अंदर आते हैं । नेताओं के जरिए दलबदल किया जाता है । झूठे वादे किए जाते हैं । जोड़-तोड़ के कार्य किए जाते हैं या घृणित कार्य किए जाते हैं । लेकिन यह सब राजनीति नहीं है और दुर्भाग्य की बात यह है कि अब बहुत सारे राजनीतिक संगठन और गैर सरकारी संगठन राजनीति करने लगे हैं ।

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राजनीति का असली अर्थ बहुत अलग है । राजनीति का जो संबंध है वह सरकार के क्रियाकलापों से है और राजनीति के जरिए ही यह तय किया जाता है कि हमारे लिए और हमारे समाज के लिए क्या सही है और क्या गलत है ।

राजनीतिक सिद्धांत के अंदर हम बहुत सारे सिद्धांतों अध्ययन करते हैं । इसलिए राजनीति का अध्ययन करना हम सब के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है, उपयोगी है और प्रसांगिक है । क्योंकि राजनीतिक सिद्धांतों का अध्ययन करने से हमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय, लोकतंत्र इन सभी अवधारणाओं की जानकारी प्राप्त होती है ।

राजनीतिक सिद्धांतों का अध्ययन करने से हमें पता लगता है कि हमारे अधिकार क्या है ? हमारे कर्तव्य क्या है ? इसीलिए राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन हम सबके लिए बहुत जरूरी है ।

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राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन करने से हमें राज्यों के बारे में पता लगता है । सरकार के बारे में पता लगता है । सरकार के कामों के बारे में हमें पता लगता है । इसीलिए हम सभी राजनीतिक सिद्धांत का अध्ययन करते हैं ।

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राजनीतिक रूप से जागरूक होने के लिए भी राजनीति का अध्ययन करना बहुत ही जरूरी है ।

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अगर हम राजनीतिक सिद्धांत की बात करें राजनीतिक सिद्धांत दो शब्दों से मिलकर बना है । राजनीति और सिद्धांत ।

राजनीति का अर्थ तो हम सभी जान चुके हैं । अब जरा सिद्धांत का अर्थ जान लेते हैं । सिद्धांत को English में Theory कहते हैं । जिसका मतलब होता है,

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“भावनात्मक सोच-विचार यानी, एक ऐसी मानसिक दृष्टि जिसके जरिए हम किसी वस्तु के अस्तित्व को और कारणों को समझने की कोशिश करते हैं ।”

इस तरीके से राजनीति सिद्धांत का मतलब है । किसी समस्या के संबंध में विचारक यह बताता है कि समस्या के समाधान के लिए क्या होना है । सबसे पहले विचारक समस्या का अध्ययन करता है । उसका अर्थ बताता है । विश्लेषण करता है । और आखिर में बताता है कि इस समस्या समाधान आखिर किस तरीके से किया जाएगा ।

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राजनीतिक सिद्धांत को व्यवहार में लागू करने बहुत मुश्किल है क्योंकि इसके अंदर एक एक शब्द की कई परिभाषाएं होती है । अब एक शब्द है, ‘समानता’ तो यहां पर समानता के कई मतलब हो सकते हैं । समानता का मतलब मैं आपको बहुत ही सरल भाषा में समझाता हूं । “समानता का मतलब है सभी को समान अधिकार देना किसी को भी विशेष अधिकार या छूट नहीं देना ।”  इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं । मान लीजिए एक बहुत लंबी लाइन लगी है । आप और मैं बहुत देर से घंटों से उस लाइन में खड़े हैं । आप का भी नंबर नहीं आ रहा और मेरा भी नंबर नहीं आ रहा बहुत देर हो रही है । अचानक हम देखते हैं कि एक व्यक्ति जो बिना लाइन के आता है और अपना काम करवा कर चला जाता है । तो आपको और मुझे कितना बुरा लगेगा । बहुत ही बुरा और हम अपने आप को ठगा सा महसूस करेंगे ।

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वास्तविकता में तो जितने भी लोग हैं सब लाइन में लगकर अपना काम कराएं । इसमें किसी को ज्यादा अधिकार या कोई छूट न दी जाए इसे ही समानता कहते हैं । अब मान लीजिए बिना लाइन के काम करवाने वाला व्यक्ति भी अपंग है,  या बहुत ज्यादा बुजुर्ग है जिससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा है । तब आप क्या सोचेंगे चलो कोई बात नहीं यह हमारी तरह नहीं है । इसीलिए इस को छूट दी जानी चाहिए ।

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तो इसी तरीके से राजनीति सिद्धांत को व्यवहार में लागू करना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि इसके अंदर गणित की तरह या और किसी विषयों की तरह किसी भी शब्द की एक परिभाषा नहीं है । जैसे कि गणित के अंदर त्रिभुज को ही मन लो- त्रिभुज की एक परिभाषा है तीन भुजाओं के जोड़ को त्रिभुज कहते हैं । लेकिन समानता किसे कहेंगे सब को लाइन में खड़ा होने के लिए समानता कहेंगे या कुछ लोगों को ज्यादा छूट देना या फिर उनको अधिकार देना इसको समानता कहेंगे । तो इस तरीके से राजनीतिक सिद्धांत को व्यवहार में लागू करना बहुत ही मुश्किल है ।

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आज दुनिया के ज्यादातर देशों में लोकतंत्र अपनाया जा चुका है । लोकतंत्र का सफल संचालन यानी लोकतंत्र सही तरीके से काम करे यह तभी संभव है जब नागरिक जागरुक हो क्योंकि लोकतंत्र के अंदर जनता के द्वारा सरकार बनाई जाती है । जनता वोट देकर अपने प्रतिनिधित्व को चुनती है और वह प्रतिनिधि संसद के अंदर बैठते हैं और शासन चलाते हैं । इसीलिए चुनावों के समय मतदाताओं के जरिए योग्य और काबिल उम्मीदवार की चुना जाना बहुत जरूरी है । सिर्फ वोट देने से हमारी जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती बल्कि सरकार के बनने के बाद भी हमें जागरुक रहने की आवश्यकता है, ताकि सरकार हमारे अधिकारों का हनन (Misuse) ना कर सके या ऐसा कोई काम ना करें जो हमारे लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक हो । अगर सरकार कोई ऐसा कदम उठाती है और नागरिक जागरुक है तो ऐसे में सरकार के गलत कामों पर लगाम लगाई जा सकती है । जैसे सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया जा सकता है । अदालत के अंदर याचिका दायर की जा सकती है ताकि सरकार को भी सही रास्ते पर लाया जा सके ।

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बोलना भी एक कला है । हम अपने अच्छे तर्कों से किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं और अगर हमारे तर्कों के अंदर जान है या महत्व तो सामने वाले पर उस बात का असर बहुत जल्दी होगा । इतिहास इस बात का गवाह है । बहुत सारे महत्वपूर्ण व्यक्ति जैसे कि गांधीजी, महात्मा बुद्ध, प्लेटो, अरस्तु, रूसो आदि काफी सारे लोगों ने नेपोलियन बोनापार्ट, हिटलर आदि । यह लोग ऐसे थे जिन्होंने अपनी बोलने की कला से दूसरों को प्रभावित किया और इनकी बातों का असर दूसरों पर जादू की तरह होता था । इनकी बातों को सुनने वाला इनकी बातों पर अमल करता था और अगर हम चाहते हैं कि सामने वाला हमारी बातों को मानें तो हमें एक अच्छा तर्क देना होगा क्योंकि एक अच्छा और प्रभावपूर्ण तर्क दूसरों को आप की बात सुनने के लिए मजबूर कर देता है, बाध्य करता है ।

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तो दोस्तों यह था राजनीति सिद्धांत-एक परिचय (An introduction of Political Theory), अगर आपको इस Chapter के Detail में Notes चाहिए तो आप हमारे WhatsApp वाले नंबर 9999338354 पर Contact कर सकते हैं | आप इस जानकारी को अपने दोस्तों के साथ Share करें | धन्यवाद

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