राजनीति का मार्क्सवादी दृष्टिकोण

Marxist views on Politics

Hello दोस्तों ज्ञान उदय में आपका एक बार फिर स्वागत है । आज हम आपके लिए लेकर आए हैं ‘राजनीति का मार्क्सवादी दृष्टिकोण’ Marxist views on Politics.

सामंजस्य की प्रक्रिया

उदारवादी दृष्टिकोण के हिसाब से राजनीति हितों में सामंजस्य लाने वाली प्रक्रिया है और हितों में टकराव को रोकने वाली प्रक्रिया है । मार्क्स के अनुसार राजनीतिक हितों में टकराव को नहीं रोकती । इसके विपरीत राजनीति वर्ग संघर्ष को रोकती और वर्ग संघर्ष की वजह से ही राजनीति पैदा हुई है । मार्क्स ने राजनीति को आर्थिक और भौतिक संदर्भ में स्पष्ट किया है । मार्क्स के अनुसार आर्थिक और भौतिक संदर्भों पर जिनका स्वामित्व होता है । राजनीति उन्हीं के हिसाब से काम करती है ।

इस Topic की Video के लिए यहाँ Click करें ।

राजनीति की शुरुआत

मार्क्स ने हमें सबसे पहले बताया है कि राजनीति का उदय कैसे हुआ ? फिर राजनीति का विकास कैसे हुआ ? और अंत में राजनीति का भी अंत हो जाएगा ?

मार्क्स प्राचीन काल से प्राचीन अवस्था से बताना शुरु करता है और आधुनिक अवस्था के बारे में भी बताता है । मार्क्स बताता है कि प्राचीन अवस्था में आदिमानव वाली अवस्था में । पहले लोगों की जनसंख्या कम थी और आवश्यकताएं भी सीमित थी । और संसाधन ऐसे में थे । जो कुछ था, वह सब का था । इस युग में ना तो वर्ग संघर्ष था और ना ही राजनीति थी । धीरे-धीरे करके लोगों की जनसंख्या बढ़ने लगी । लोगों की आवश्यकताएं बढ़ती हैं और संसाधन कम होने लगते हैं । जिससे वर्ग संघर्ष शुरू हो जाता है । संसाधनों पर शक्तिशाली लोग कब्जा कर लेते हैं और शक्तिशाली लोग संसाधनों को अपने फायदे के लिए अपनी सुविधा के अनुसार इस्तेमाल करते हैं ।

विशिष्ट वर्गीय सिद्धांत के लिए यहाँ Click करें ।

इस तरीके से शक्तिशाली लोग जब संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं । तो उसके बाद वह गरीब और कमजोर वर्ग से लाभ उठाते हैं । इसके बाद समाज में 2 तरीके के वर्ग पैदा हो जाते हैं ।

एक साधन संपन्न वर्ग जिसके पास सभी साधन होते हैं या उसने सभी साधनों पर अपना कब्जा किया हुआ होता है । और

दूसरा साधन विहीन वर्ग जिसके पास साधन नहीं होते ।

मार्क्स के अनुसार दोनों वर्गों में आगे चलकर संघर्ष होगा, क्योंकि दोनों वर्ग एक दूसरे से घृणा करते हैं । नफरत करते हैं । अमीर गरीब से नफरत करता है । गरीब अमीर से नफरत करता है । तो इस समाज के अंदर एक वक्त होता है क्योंकि पूंजीपति अपने लाभ के लिए गरीब का शोषण करता है और गरीब इंसान बहुत मेहनत करता है । उसके पास फिर भी कुछ नहीं मिल पाता । तो ऐसे में वर्ग संघर्ष होगा और इस वर्ग संघर्ष में जीत उसकी होगी जिसकी संख्या ज्यादा होगी यानी गरीबों की संख्या ज्यादा होगी तो गरीब जीत जाएंगे और अमीर हार जाएंगे । सभी गरीब मिलकर एक नई व्यवस्था बनाएंगे । साम्यवादी व्यवस्था जिसमें सिर्फ एक ही राजनीतिक दल होगा । सभी लोगों की जरूरतों को वहीं राजनीतिक दल पूरा करेगा । लोगों को आवश्यकता के अनुसार वेतन दिया जाएगा । उनकी योग्यता के अनुसार उनको काम दिया जाएगा । इस तरीके से धीरे-धीरे करके साम्यवाद का प्रशिक्षण दिया जाएगा । लोगों को बहुत कम अधिकार और स्वतंत्रता दी जाएगी । जब लोगों को धीरे-धीरे करके इस तरह की आदत हो जाएगी तो राजनीति ही खत्म हो जाएगी ।

3rd Year B.A. Important Questions के लिए यहाँ Click करें ।

यह एक आदर्श अवस्था होगी । लेकिन मार्क्स का यह कहना गलत है कि राजनीति खत्म हो जाएगी । आज के इस दौर में राजनीति की भूमिका बहुत बढ़ चुकी है । राजनीति अब आसानी से खत्म नहीं हो सकती और राजनीति सिर्फ वर्ग संघर्ष को बढ़ावा नहीं देती । बल्कि राजनीति कल्याण को भी बढ़ावा देती है । राजनीतिक वर्ग संघर्ष को भी रोकती है । तो मार्क्स के  विचारों की आलोचना की जा सकती है । क्योंकि उसके अंदर बहुत सारी कमियां हैं ।

राजनीति सिद्धान्त (Political Theory in Hindi) के बारे पढ़ने के लिए यहाँ Click करें ।

तो दोस्तों ये था मार्क्स का राजनीति दृष्टिकोण । अगर आपको यह पोस्ट अच्छी लगी तो वेबसाइट को Subscribe करें ।  like करें अपने दोस्तों के साथ Share करें ।

अगर आपको इस Topic से Related Notes चाहिए तो आप हमारे whatsapp no. 9999338354 पर सम्पर्क करें ।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.