मैक्यावली राजनीतिक विचारक

Political thinker Niccolò Machiavelli in Hindi

Hello दोस्तों ज्ञानोदय में आपका स्वागत है और आज हम बात करेंगे राजनीति विज्ञान में पुनर्जागरण के प्रतिनिधि मैक्यावली के बारे में । (Western Political thinker Niccolò Machiavelli in Hindi), दोस्तों मैक्यावली को इटली का चाणक्य कहा जाता है । इसके अलावा मैक्यावली को ‘पुनर्जागरण का शिशु’ के नाम से भी जाना जाता है ।

मैक्यावली का पूरा नाम निकालो मैक्यावली (Niccolò Machiavelli) है । इनका जन्म 1469 में इटली के फ्लोरेंस शहर में हुआ था । प्रतिभाशाली और योग्यतावान होने के कारण मैक्यावली को फ्लोरेंस की तरफ से 23 बार राजदूत पद पर नियुक्त किया गया । दार्शनिक और राजनीतिक जीवन पर उनके देश और परिस्थितियों का गहरा प्रभाव पड़ता है । लेकिन मैक्यावली पर उसके तत्कालीन सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक और नैतिक वातावरण का प्रभाव बहुत अधिक था ।

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विचारक डनिंग मैक्यावली के बारे में कहते हैं कि,

“वह प्रतिभा संपन्न फ्लोरेंस निवासी वास्तविक अर्थों में अपने युग का एक शिशु था ।”

मैक्यावली की प्रमुख रचनाएं

आइये अब जानते हैं मैक्यावली की प्रमुख रचनाओं के बारे में । मैक्यावली ने अपने युग की परिस्थितियों को बखूबी समझा और उनके लिए बहुत सारे समाधान बताए । मैक्यावली अपने समय के प्रसिद्ध लेखक भी थे ।

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उन्होंने बहुत सारी रचनाओं का प्रतिपादन किया । उन्होंने अपना लेखन का काम समकालीन परिस्थितियों के आधार पर किया । अपने युग की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, मैक्यावली ने अपनी रचनाओं में उनका ज़िक्र किया है । जो कि निम्नलिखित हैं ।

1) द आर्ट ऑफ वार (The Art of War) सन 1521- इस रचना में युद्ध कला के बारे में बताया गया है ।

2) द हिस्ट्री ऑफ फ्लोरेंस (The History of Florence) सन 1532- इस पुस्तक में  इटली के इतिहास का वर्णन मिलता है ।

3) द डिस्कोर्से (The Discourse) सन 1530- इस रचना में गणतंत्रात्मक सरकार का पक्ष तथा व्यवहारिक राजनीति से संबंधित जानकारी उपलब्ध है ।

4) द प्रिंस (The Prince) सन 1532- मैलक्यावली की यह सबसे प्रसिद्ध रचना है, जिसमें राज्य, कला सिद्धांत का पूर्ण विवरण मिलता है ।

इन रचनाओं में उन परिस्थितियों से संबंधित समाधान को प्रस्तुत किया गया है, जो उस युग में थीं । मैक्यावली अपने युग से बहुत ज्यादा प्रभावित थे । ऐसे बहुत कम विचारक होते हैं, जो अपने युग से प्रभावित होते हैं । मैक्यावली का युग पुनर्जागरण का युग था इसलिए उन्हें पुनर्जागरण का प्रतिनिधि भी कहा जाता है ।

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निम्न तथ्यों के कारण मैक्यावली को अपने युग का शिशु कहा जाता है । बहुत सारी परिस्थितियां जो मैक्यावली को शिशु की उपाधि देती हैं, निम्नलिखित हैं ।

1) पुनर्जागरण

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि पुनर्जागरण का आरंभ इटली से हुआ था । यह ज्ञान और बुद्धि का दोबारा उदय था । इसमें मनुष्य और विश्व के प्रति नया दृष्टिकोण अपनाया गया । मध्यकालीन धर्म, चर्च के प्रभाव की समाप्ति, कोई नई चेतना स्वतंत्रता तथा मूल्यों के प्रति लोगों की आस्था पैदा हुई । धर्म और आस्था का स्थान, बुद्धि विवेक ने ले लिया साथ ही साथ तर्कपूर्ण विचारों ने भी  ले लिया ।

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फ्लोरेंस इस नई संस्कृति का केंद्र था और मैक्यावली ने अपने चिंतन में धर्म तथा नैतिकता के स्थान पर राष्ट्रवाद पर बल दिया तथा राजनीति को धर्म तथा नैतिकता से अलग किया । मैक्यावली के अनुसार निम्न कथन प्रमुख है ।

“मनुष्य की प्रत्येक वस्तु का मापदंड है तथा मनुष्य स्वयं अपने जीवन और भाग्य का निर्माता है ।”

2) शक्तिशाली राजतंत्रों की स्थापना

सोलवीं सदी के अंत तक चर्च और राजसत्ता का आंदोलन समाप्त हो गया । इसके बाद केंद्रीयकरण की प्रवृत्ति की ओर बढ़ने लगी थी । यूरोपियों राजाओं ने शक्ति अब अपने हाथों में केंद्रित कर ली थी । मैक्यावली ने भी इटली के लिए एक ऐसे शासन की कल्पना की थी, जिसमें इटली की समस्त राजनीतिक शक्तिओं का केंद्रीयकरण हो तथा इटली में एकता तथा एक मज़बूत राजतंत्र की स्थापना हो और उसकी नींव रखी जा सके ।

3) राष्ट्रीयता की भावना

कई राज्यों जैसे इंग्लैंड, फ्रांस, स्पेन में राष्ट्रीय एकीकरण की प्रक्रिया पूर्ण हो गई थी । इटली इस समय पांच राज्यों में बंटा हुआ था । ये राज्य थे, नेपल्स, रोमन, ढचि, वेनिस और फ्लोरेंस । यहां तक कि ये राज्य अभी भी आपस में संघर्ष कर रहे थे और बहुत ही कमजोर थे । यदि इटली में मज़बूत केंद्रीय सरकार ना स्थापित हुई होती तो फ्रांस अथवा स्पेन उसे हड़प कर ले जाते । इसलिए उसने इटली में राष्ट्रीय एकीकरण के लिए अपने ग्रंथों प्रिंस आर्ट ऑफ वार और डिस्कोर्स माध्यम से एक मज़बूत केंद्रीय सत्ता स्थापित करने की कोशिश की ।

4) धर्म और नैतिकता

उस समय में चर्च के पादरियों (pope) द्वारा साधारण व्यक्तिओं का शोषण किया जाता था । इसके अलावा जनता ने राजाओं से उम्मीद भी छोड़ दी थी ।इस सामाजिक दुर्दशा का मैक्यावली के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा । इटली के एकीकरण तथा शक्तिशाली बनाने के लिए उसने निरंकुश राजतंत्र का समर्थन किया गया । इसमें मैक्यावली राजाओं के लिए दो प्रमुख कथन कहे,

“प्रेम की अपेक्षा शक्ति से शासन करें ।”

“राज्य के अस्तित्व को बचाए रखने के लिए धर्म नैतिकता की अवहेलना करें ।”

अपने समय तथा समाज की दशा से मैक्यावली के हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ा तथा उसने व्यवहारिक रूप में घोषित किया कि मनुष्य एक स्वार्थी प्राणी है । उसमें ना तो ईश्वर या गुण हैं और ना ही नैतिकता ही है । उसने मनुष्य को खूंखार प्रवृत्ति का स्वार्थी माना ।

मैक्यावली के कुछ महत्वपूर्ण कथन हैं,

“राजा को लोमड़ी जैसा चालाक और शेर जैसा बहादुर होना चाहिए ।”

उपयुक्त विश्लेषण के आधार पर कहा जा सकता है कि वह प्रतिभा संपन्न फ्लोरेंस वासी अपने युग का एक शिशु था । व्यवहारिक राजनीतिक व कूटनीतिक कला में महारथी होने के कारण उसे इटली का चाणक्य कहा जाता है । इस तरह मैक्यावली में 58 वर्ष अपने देश की सेवा की और सन 1527 में उनकी मृत्यु हो गई ।

तो दोस्तों ये थे मैक्यावली, आधुनिक राजनीति विज्ञान के जनक कहलाने वाले विचारक के बारे में । अगर Post अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करें । तब तक के लिए धन्यवाद !!

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