भारत और कनाडा के संघवाद में तुलना-तुलनात्मक राजनीति

Comparison in Federation of India and Canada in Hindi

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दोस्तों ज्ञानोदय में आपका स्वागत है मेरा नाम मोहम्मद नौशाद है । और आज मैं आपके सामने फिर हाजिर हूं एक नया Topic लेकर इस बार हम जानेंगे संघवाद यानी Federation के बारे में और तुलना करेंगे । भारत और कनाडा के संघवाद के बीच ।

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शासन व्यवस्था कई तरीके की होती है और शासन की शक्ति का इस्तेमाल कई तरीके से किया जा सकता है । अब शासन व्यवस्था का प्रयोग या शासन शक्ति का इस्तेमाल एक स्थान से भी किया जा सकता है और कई स्थानों से भी किया जा सकता है । इस हिसाब से शासन व्यवस्था को दो हिस्सों में बांट सकते हैं ।

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एकात्मक शासन (Unity Federal) और

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संघात्मक शासन

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एकात्मक शासन जिस शासन व्यवस्था में सभी शक्तियां केंद्र सरकार के पास होती हैं । उसे एकात्मक शासन कहते हैं । और जो शासन व्यवस्था में केंद्र और राज्य के बीच शक्तियों का बंटवारा कर दिया जाता है । उसे संघात्मक शासन व्यवस्था कहते हैं ।

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इसलिए संघवाद एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसमें संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का बंटवारा किया जाता है । यहां पर संघवाद भी दो तरह का का होता है ।

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1 एकीकरण

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2 और प्रथक्करण

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बहुत सारे छोटे और बड़े कई राज्य अपनी समान आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मिल जाते हैं । एकजुट हो जाते हैं । तो एकीकरण संघात्मक का निर्माण होता है । जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका । जबकि कोई देश खुद को राजनीतिक सुविधाओं के लिए या आर्थिक सहूलियत के लिए खुद को कई हिस्सों में या प्रांतों में बांट लेता है । तो उसे प्रथक्करण संघात्मक कहते हैं । इस तरीके प्रथक्करण यानी अलग-अलग संघात्मक का निर्माण होता है । जैसे कि भारत और कनाडा ।

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संघवाद का अर्थ (Meaning of Federalism)

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संघवाद को अंग्रेजी में हम Federalism कहते हैं जो कि संघ शब्द से बना है । संघ को English में कहते हैं Federation जो कि लैटिन भाषा के शब्द foiduss से बना है । जिसका मतलब होता है, संधिया/ समझौता तो इस तरीके से संघवाद ऐसी शासन व्यवस्था है । जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच या राज्यों के बीच आपस में समझौता होता है । तो इस तरीके से संघवाद एक ऐसी शासन व्यवस्था है जिसका निर्माण समझौते के जरिए होता है ।

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संघवाद की विशेषताएं (Features of Federalism)

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संघवाद की बहुत सारी विशेषताएं हैं सबसे पहली विशेषता है

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1 शक्तियों का बंटवारा (division of powers)

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संघवाद में संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्यों के बीच स्पष्ट रूप से शक्तियों का बंटवारा कर दिया जाता है । अब जो महत्वपूर्ण विषय होते हैं । जैसे की प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, बैंकिंग यह सब केंद्र के पास होते हैं । और जो स्थानीय विषय होते हैं । जैसे कि पुलिस, कानून व्यवस्था, खेतीवाड़ी, पशुपालन आदि । यह सब राज्य सरकारों के पास होते हैं । तो इस तरीके से संघवाद में संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्ति का बंटवारा कर दिया जाता है । दूसरी विशेषता है

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2 दोहरी सरकार (Dual Government)

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दोहरे शासक संघवाद में दो तरीके की सरकारें पाई जाती हैं । एक केंद्र सरकार जो पूरे देश का शासन चलाती है । दूसरी राज्य सरकार जो हर राज्य के अंदर होती है । और किसी एक राज्य का ही शासन चलती है ।

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3 दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship)

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तीसरी जो विशेषता वह दोहरी नागरिकता है । संघवाद में दोहरी नागरिकता देखने को मिलती है । एक राष्ट्रीय नागरिकता पूरे देश की नागरिकता । दूसरी प्रांतीय नागरिकता । जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका के अंदर दोहरी नागरिकता पाई जाती है । हालांकि भारत में संघात्मक शासन व्यवस्था के होते हुए भी इकहरी नागरिकता को अपनाया गया है ।

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4 संविधान की सर्वोच्चता (Supremacy of Constitution)

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संविधान को सर्वोच्च माना जाता है क्योंकि संघ का जो निर्माण होता है । वह समझौते के जरिए होता है । और इस समझौते को संविधान के अंदर प्रकट किया जाता है, दिखाया जाता है । इसलिए संविधान को सर्वोच्च माना जाता है ताकि केंद्र और राज्यों के बीच स्पष्ट रूप से शक्तियों का बंटवारा किया जा सके । यह सब संविधान में लिखित रूप में होता है ।

5 न्यायपालिका की सर्वोच्चता (Supremacy of judicial)

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और इसकी जो पांचवी विशेषता है वह है न्यायपालिका की सर्वोच्चता । न्यायपालिका संविधान की रक्षा करती है । संविधान की व्याख्या करती है । केंद्र और राज्यों के बीच अगर कोई विवाद पैदा हो जाता है तो उन विवादों का निपटारा करती है । इसीलिए संघवाद के अंदर न्यायपालिका को सर्वोच्च माना जाता है ताकि यह समझौता बना रहे और कोई समस्या ना हो । इसके अलावा न्यायपालिका इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाती है ।

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भारत और कनाडा के संघवाद में तुलना (Comparison of Unionism of India and Canada)

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भारत और कनाडा दोनों में ही संघात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया गया है । दोनों देशों के संघात्मक शासन व्यवस्था के अंदर काफी सारी समानताएं हैं । और ऐसा माना जाता भी हैं कि भारत ब्रिटिश शासन से आजाद होने वाला पहला देश है । जिसने संघात्मक शासन व्यवस्था को अपनाया । भारतीय संविधान निर्माताओं ने दुनियाभर के संविधानों का निरीक्षण किया । और दुनिया भर के संविधान के अंदर से कुछ ना कुछ प्रावधान भारतीय संविधान में शामिल कर लिए । अब जो संघात्मक शासन व्यवस्था को लिया, वह कनाडा से लिया तो इस तरीके से भारत का जो संघवाद है वह कनाडा के संघवाद से प्रेरित है । इसी वजह से भारत और कनाडा के संघवाद में काफी सारी समानताएं पाई जाती हैं ।

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भारत और कनाडा के संघवाद में समानता (Equality in India and Canada Federalism )

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भारत और कनाडा के संघवाद में काफी सारी समानताएं पाई जाती हैं जिसमें सबसे पहली समानता है

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1 संसदीय शासन प्रणाली (Parliamentary System)

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भारत और कनाडा दोनों में संसदीय शासन प्रणाली को अपनाया गया है । संसदीय शासन प्रणाली के अंदर राष्ट्रपति अपनी शक्ति का इस्तेमाल संसद की सलाह से करता है और खुद नाम मात्र की शक्ति रखता है । हालांकि अमेरिका के अंदर राष्ट्रपति शक्तिशाली है । और राष्ट्रपति अपनी तमाम शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है । शुरू में अमेरिका के संघीय व्यवस्था को एक आदर्श व्यवस्था माना जाता था । लेकिन बाद में भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी इन देशों ने भी संघात्मक व्यवस्था को अपने हिसाब से अपनाया । फिर यह विचार पैदा हुआ कि संघवाद के लिए अमेरिका की नकल करना आवश्यक नहीं है । हर देश अपनी सहूलियत के हिसाब से । अपनी परिस्थितियों के हिसाब से संघवाद को बदल कर भी अपना सकता है । जैसे कि भारत के अंदर अमेरिका की तरह राष्ट्रपति शक्तिशाली नहीं है । बल्कि संसद शक्तिशाली है और संसद ही फैसले लेती है ।

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2 लिखित व कठोर संविधान (Written and Harsh Constitution)

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दूसरी जो समानता है भारत और कनाडा के संघवाद में वह है संविधान को लेकर । भारत और कनाडा को जो संविधान हैं । वह लिखित और आंशिक रूप से कंट्रोल संविधान है । भारतीय संविधान के अंदर कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिन्हें साधारण बहुमत से संशोधित किया जा सकता है । जबकि बहुत सारे प्रावधान ऐसे भी हैं जिन्हें संशोधन करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है । और विशेष बहुमत के साथ साथ आधे राज्यों की सहमति की भी आवश्यकता होती है । इस तरीके से यह जो दूसरी वाली प्रक्रिया है संशोधन की यह थोड़ी सी जटिल है । लेकिन कनाडा में तो इससे भी ज्यादा जटिल प्रक्रिया को अपनाया गया है । कनाडा में बहुत सारे प्रावधान ऐसे हैं जो संविधान में जिस में बदलाव लाने के लिए संशोधन करने के लिए सभी राज्यों की सहमति की आवश्यकता होती है ।

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3 न्यायाधीशों की नियुक्ति (Judicial Appointments)

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तीसरी जो व्यवस्था है भारत और कनाडा के संघवाद में न्यायाधीशों की नियुक्ति और पद मुक्ति  को लेकर । भारत के अंदर और कनाडा के अंदर न्यायाधीशों की नियुक्ति और पद मुक्ति की जो विधि है वह एक समान है । जैसे भारत के अंदर राष्ट्रपति के द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाती है और संसद के निवेदन पर ही उनको हटाया जा सकता है । जब संसद महाभियोग प्रस्ताव पास कर देती है तब न्यायाधीश को हटाया जा सकता है । इसी तरीके से कनाडा के अंदर भी न्यायाधीशों की नियुक्ति गवर्नर ऑफ जनरल के द्वारा की जाती है । और संसद के अनुमोदन पर ही उनको हटाया जा सकता है । तो न्यायाधीशों की नियुक्ति पद मुक्ति के मामले में भी भारत और कनाडा के संघवाद में काफी हद तक समानता पाई जाती है ।

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4 केंद्रीय संघवाद (Central Unionism)

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भारत और कनाडा का जो संघवाद है यह केंद्रीय संघवाद हैं । क्योंकि भारत के अंदर केंद्र सरकार ज्यादा शक्तिशाली है जितने भी महत्वपूर्ण विषय हैं । वह केंद्र के पास हैं । ठीक इसी तरीके से कनाडा के अंदर भी राज्यों के मुकाबले केंद्र को ज्यादा शक्तियां दी गई है । और केंद्र के पास 29 महत्वपूर्ण विषय हैं । अगर भारत के अंदर बात करें तो भारत के अंदर शक्तियों का बंटवारा करने के लिए तीन सूचियां बनाई गई हैं ।

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अ. संघ सूची

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ब. राज्य सूची

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स. समवर्ती सूची

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संघ सूची के अंदर 97 विषय दिए गए हैं । और संघ सूची पर केंद्र सरकार शासन बनाती है । राज्य सूची केंद्र शासित विषय हैं । तो ज्यादा विषय तो केंद्र के पास है । और समवर्ती सूची के अंदर 45 विषय हैं । जिस में राज्य और केंद्र दोनों कानून बना सकते हैं लेकिन अगर टकराव पैदा हो जाए तो न्यायपालिका फैसला लेती है । और ज्यादातर केंद्र के कानूनों के अंदर पूरी आजादी है ।

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तो इस तरीके से भारत और कनाडा के संघवाद में बहुत ज्यादा समानता है पर इसका मतलब यह नहीं है कि भारत और कनाडा के संघवाद के अंदर बहुत ज्यादा समानताएं हैं ।

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भारत और कनाडा के संघवाद में असमानताएं या अंतर

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भारत और कनाडा के संघवाद में बहुत सारी असमानताएं भी मौजूद हैं जिसमें से सबसे पहली

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1 राष्ट्रमंडल की सदस्यता (Commonwealth Membership)

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ऐसा माना जाता है कि राष्ट्रमंडल की सदस्यता को लेकर । भारत और कनाडा दोनों ही देश राष्ट्रमंडल के सदस्य हैं लेकिन भारत राष्ट्रमंडल का एक स्वतंत्र सदस्य है । जबकि कनाडा आधे राज्य की हैसियत से राष्ट्रमंडल का सदस्य है ।

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2 उच्च सदन की संरचना (Structure of Upper House)

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उच्च सदन की संरचना यानी बनावट । भारत में उच्च सदन को राज्यसभा कहा जाता है । जबकि कनाडा में उच्च सदन को सीनेट कहा जाता है । भारत के अंदर राज्य सभा के या उच्च सदन के 12 सदस्यों को नॉमिनेट किया जाता है जबकि कनाडा के उच्च सदन सीनेट के सभी सदस्य गवर्नर जनरल के द्वारा नियुक्त किया जाता है । मनोनीत किया जाता है । इन दोनों की उच्च सदन की संरचना केंद्र बहुत ज्यादा फर्क है ।

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3 धन विधेयक (Money Bill )

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तीसरा जो अंतर है वह धन विधेयक के संबंध में है । भारत के अंदर राज्यसभा धन विधेयक के मामले में शक्ति हीन है । और राज्यसभा के पास कोई शक्ति नहीं है । धन विधेयक पहली बार लोकसभा में पेश किया जाता है । राज्यसभा में नहीं और लोकसभा में पास होने के बाद इसे राज्यसभा में भेजा जाता है । राज्यसभा के पास 14 दिन का समय होता है । 14 दिन में राज्यसभा उस विधेयक को पास करती है तो ठीक है नहीं तो वह विधेयक पास समझा जाता है । तो धन विदेश के मामले में हमारी जो राज्यसभा वह शक्तिहीन है उसके पास कोई पावर नहीं है । लेकिन कनाडा के अंदर जो दूसरा सदन है उच्च सदन सीनेट वह धन विधेयक के संबंध में बहुत शक्तिशाली है । वह धन के अंदर कोई भी संसद संशोधन कर सकता है किसी भी तरीके का और उसे पास होने से भी रोक सकता है तो धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा कमजोर है । भारत के और जो कनाडा की सीनेट है उच्च सदन है वह शक्तिशाली है ।

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4 राज्य अध्यक्ष की स्थिति (State President Position)

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और चौथा जो सबसे बड़ा अंतर है वह है । राज्य अध्यक्ष की स्थिति को लेकर । भारत के अंदर राष्ट्रपति के पास शक्तियां बहुत कम है । अगर संसद कोई भी कानून बनाती है कोई अधिनियम पास करती है तो राष्ट्रपति को अपनी स्वीकृति देनी पड़ेगी । राष्ट्रपति उस विधेयक पर अधिनियम पर अपनी स्वीकृति देने से इनकार नहीं कर सकता । लेकिन कनाडा के अंदर गवर्नर के पास ही अधिकार है कि वह राज्यों के द्वारा पास किए गए कानूनों अस्वीकृत भी कर सकता है ।

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अब दोनों देशों की व्यवस्था को अध्ययन करने से पता लगता है कि भारत का जो संघवाद है वह भारतीय परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर है और भारत के According है । इसीलिए भारत का संघवाद बेहतर माना जाता है भारत के हिसाब से । दोस्तों यह था आपका Federalism संघवाद

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अगर आपको इस Chapter के Detail में Notes चाहिए तो आप हमारे Whatsapp वाले नंबर 9999338354 पर Contact कर सकते हैं ।

धन्यवाद

This Post Has One Comment

  1. Thank you sir. Very good knowledge.. keep on

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