नव यथार्थवाद

Neo Realism

Hello दोस्तों ज्ञानोदय में आपका स्वागत है । आज हम बात करते हैं, नव यथार्थवाद (Neo Realism) की । नव यथार्थवाद को जानने से पहले आपको यथार्थवाद के बारे में भी जानना चाहिए, जिसका Link नीचे दिया गया है, जिसे आप पढ़ सकते हैं । आप यथार्थवाद (Realism Approach) की Video भी नीचे Link के द्वारा देख सकते हैं ।

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नव यथार्थवाद का अर्थ

अब हम बात करते हैं, नव यथार्थवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों तथा विश्व राजनीति के नए स्वरूप में यथार्थवाद की पुनर्स्थापना है ।

नव यथार्थवाद के बारे में सबसे पहले आपको यह पता होना चाहिए कि नव यथार्थवाद, यथार्थवाद की ही दूसरा रूप है और विश्व राजनीति के नए ढांचे में यथार्थवाद की पुनर्स्थापना है या तो हम यह कह सकते हैं कि यह मॉर्गेनथायू के यथार्थवाद की पुन:व्याख्या है । जिसको कैनेथ वेल्टज़ ने पेश किया है ।

यथार्थवाद और नव यथार्थवाद में अंतर

यथार्थवाद का सिद्धांत मॉर्गेनथायू ने प्रतिपादित किया और नव यथार्थवाद का सिद्धांत को कैनेथ वेल्टज़ द्वारा प्रस्तुत किया गया । यानी कि यह अवधारणा यह सिद्धांत इन्हीं का है । अर्थात जहां आपको यथार्थवाद में मॉर्गेनथायू को याद रखना था । वही नव यथार्थवाद में आपको कैनेथ वेल्टज़ को याद रखना है ।

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यथार्थवाद कहते हैं कि हर व्यक्ति अपनी शक्ति बढ़ाना चाहता है और व्यक्ति के आधार पर मॉर्गेनथायू ने कहा था कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी सुरक्षा के लिए शक्ति बढ़ाने चाहिए । लेकिन यहां पर कैनेथ वेल्टज़ कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय संसार में संरचना ही कुछ ऐसी है कि प्रत्येक राष्ट्र शक्तिशाली बनना चाहता है । उदाहरण के लिए आप आज के इस दौर में देखते हो कि अधिकतर देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, नए नए हथियार खरीद रहे हैं और अपना रक्षा बजट भी बड़ा रहे हैं ।

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दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि मॉर्गेनथायू ने अपनी पुस्तक The Politics Among Nation (दी पॉलिटिक्स अमंग नेशन) में यथार्थवाद के बारे में बताया है । जबकि नव यथार्थवाद के बारे में कैनेथ वेल्टज़ ने अपनी पुस्तक A Theory of International Relations (अ थ्योरी ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन्स) में बताया है और यह नव यथार्थवाद की मौलिक रचना मानी जाती है । तो आपको नव यथार्थवाद के लिए कैनेथ वेल्टज़ और इनकी पुस्तक दोनों का नाम याद होना चाहिए ।

इसके अलावा परंपरागत यथार्थवाद में जहां मानव स्वभाव को स्वार्थी और लोभी माना जाता है । वही नव यथार्थवाद में व्यक्ति को इतना स्वार्थी और लोभी नहीं माना जाता, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था में मौजूद हिंसा व असंतुलन के लिए अंतरराष्ट्रीय संरचना को जिम्मेदार मानता है । यानी कि मॉर्गेनथायू मानव के स्वभाव को स्वार्थी माना था । जबकि नव यथार्थवाद में अंतरराष्ट्रीय संरचना को ही इसका जिम्मेदार माना था ।

नव यथार्थवाद की विशेषता

दूसरे शब्दों में नव यथार्थवाद मानवीय प्रकृति के बजाय, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अध्ययन को केंद्रीय विषय मानता है । यानी कि मानव के स्वभाव को अध्ययन करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अध्ययन पर ज्यादा जोर देता है और यही इसकी विशेषता है और लक्षण है । जो इसे यथार्थवाद से अलग बनाता है । बहुत से विद्वान इसे यथार्थवाद का ही वैज्ञानिक रूप भी मानते हैं ।

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तो यही इसका मुख्य अंतर है मॉर्गेनथायू मानव के स्वभाव को यह दोषी मानता है । जबकि नव यथार्थवाद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को ही दोषपूर्ण माना जाता है ।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण सिद्धांत

यथार्थवाद के आलोचनात्मक रूप में, नव यथार्थवाद का एक अंतरराष्ट्रीय सिद्धांत हमारे सामने आता है । इसके लेखक कैनेथ वेल्टज़ और जॉन मरसाइबल हैं । तो आपको याद रखना है और अपने Exam में आपको लिखना है, कि जिस विचारक ने यह  theory दी है, उनके नाम और इससे बाहर कुछ नहीं आता । उनकी लिखी किताबों को याद रखें । थ्योरी ऑफ इंटरनेशनल पॉलिटिक्स 1979 , Men State and War 1957  और मरसाइबल की किताबें हैं, Tragedy of Great Power Politics.

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तो यह था आपके लिए नव यथार्थवाद का Topic, तो इसके बारे में मुख्य Points आपको समझा दिए गए हैं | अगर आपको इसे Detail में पढ़ना है, तो आप हमें कमेंट के द्वारा बता सकते हैं ।

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