जातिवाद क्या है ? और इसके प्रभाव

जातिवाद क्या है ? इसके प्रभाव और दूर करने के उपाय

What is Casteism, Impacts in Political Science

Hello दोस्तों ज्ञानउदय में आपका एक बार फिर स्वागत है और आज हम जानेंगे राजनीति विज्ञान में जातिवाद के बारे में । जातिवाद का मतलब क्या है ? जातिवाद को बढ़ावा देने वाले कारक, समाज पर इसका प्रभाव क्या होता है ? और इसे कैसे दूर किया जा सकता है ? तो शुरू करते हैं आसान भाषा में जातिवाद (Casteism in Political Science in Hindi)

जातिवाद का अर्थ (Meaning of Casteism)

भारत में विभिन्न धर्म के लोग रहते हैं । हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई आदि । हर एक धर्म अनेक जातियों में बटा हुआ है । जातिवाद एक सिद्धान्त है, जिसमें हर धर्म के व्यक्ति द्वारा अपने धर्म और जाति को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है । यहीं से जातिवाद की समस्या पैदा होती है । अपनी जाति को दूसरी जातियों से सर्वश्रेष्ठ मानने के चक्कर में व्यक्ति दूसरी जातियों को अपनी जाति से हीन या कमतर मानने लगते हैं । यहीं से व्यक्ति के अंदर द्वेष की भावना उत्पन्न होती । वर्तमान समय में जातियों के कारण कई विवाद बढ़ा घातक रूप ले लेते हैं । भारतीय समाज में जाति व्यवस्था ने लोगों को मजबूती से जकड़ लिया है ।  

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जातिवाद को बढ़ावा देने वाले कारक

जातिवाद एक संकीर्ण भावना है और अपनी संकीर्णता की वजह से वर्तमान में यह एक नकारात्मक अवधारणा का रूप ले चुका है । केवल अपनी जाति के प्रति निष्ठा भाव ही जातिवाद है । भारतीय सामाजिक संरचना के हिसाब से जातिवाद बहुत ही महत्वपूर्ण कारक है । इसके नुकसान बहुत अधिक है और फायदे कम है । तो जातिवाद किसी एक जाति द्वारा एक ऐसी संकुचित भावना है, जो राष्ट्र और समाज के सामान्य हितों की अवहेलना करती है और एक जाति विशेष के सदस्यों को बढ़ावा देती है । अपनी ही जाति को आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करती है और इसके लिए वह कई प्रकार के उपाय भी करती है । भारतीय सामाजिक संरचना वर्ण व्यवस्था पर आधारित थी । भारतीय समाज में वर्ण व्यवस्था एक महत्वपूर्ण अंग रही है और इससे सामाजिक और राजनीतिक जीवन के सभी वर्गों को प्रभावित किया है ।

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वर्तमान युग में व्यक्ति की जाति जन्म से निर्धारित हो जाती है । कर्म से नहीं । इस प्रकार प्राचीन वर्ण व्यवस्था की विकृति के परिणाम स्वरुप जाति व्यवस्था उत्पन्न हुई और जन्म से ही उसकी जाति यानी किसी व्यक्ति की जाति निर्धारित कर दी जाती है और वह अपनी जाति को नहीं बदल सकता है । जन्म से आप किसी जात में उत्पन्न होते हैं, तो उसी जाति के होकर रह जाते हैं । ये बात अलग है कि किसी कानूनी प्रक्रिया द्वारा बदल लें ।

जातिवाद का समाज पर प्रभाव

दोस्तों जाति व्यवस्था या जातिवाद एक जात के लोगों की उस भावना को कहते है, जो अपनी जाति विशेष के हितों की रक्षा के लिए अन्य जातियों के हितों की अवहेलना भी करती है और इस भावना के आधार पर एक जाति के लोग अपने स्वार्थ के लिए, अपने लाभ के लिए या अपनी जाति श्रेष्ठता के लिए अन्य जाति या दूसरे जाति के लोगों को नीचा दिखाने के लिए प्रेरित होते हैं । भारतीय समाज में जातिवाद ने अपनी जड़ें बहुत मजबूत कर ली हैं । भारतीय समाज पर जातिवाद के दुष्प्रभाव अधिक व्यापक, गंभीर और दूरगामी है । जाति व्यवस्था सामाजिक संरचना से जुड़ा हुआ मुद्दा है ।

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जातिवाद का प्रभाव न केवल समाज पर बल्कि राजनीति पर भी पड़ता है और आज राजनीति में जातिवाद का प्रभाव इतने गहरे से बैठ चुका है या अपना प्रभाव इतना व्यापक कर चुका है कि विभिन्न राजनीतिक दलों ने जातीय समीकरणों के आधार पर उम्मीदवारों का चयन करते हैं और किसी क्षेत्र विशेष में जाति के आधार पर उम्मीदवार को तय करते हैं । किसी जाति विशेष के आधार पर वहां पर उनको जीत या विजयश्री हासिल हो सके । जातिवाद एक सामाजिक बुराई है, इसने भारतीय समाज को बहुत अधिक विषाक्त कर दिया है । इसका इलाज हो पाना कठिन हो गया है । भारतीय समाज की अवनति और पतन के लिए कई कारक उत्तरदाई हैं । लेकिन इन सब में जातिवाद बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है और जातिवाद प्रमुख कारक रहा है ।

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जातिवाद ने न केवल सामाजिक एकता को समाप्त करता है, बल्कि जाति और वर्गीय संघर्ष को बढ़ावा देकर राष्ट्रीय एकता में बाधक होता है । इससे राजनीतिक भ्रष्टाचार और नैतिक पतन की भी संभावना होती है और जातिवाद समाज की गतिशीलता और विकास में भी बाधक है ।

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जातिवाद को दूर करने के उपाय

अनेक प्रकार की समस्याएं जो है जातिवाद के कारण भी उत्पन्न होती है और लोकतंत्र में जातिवाद, कहीं न कहीं किसी एक जाति विशेष के सीमित हितों के लिए माना जाता है । वह बहुसंख्यकों के हितों को प्रभावित करता है । तो इस तरह जातिवाद को दूर करने के कई उपाय भी हो सकते हैं । कई उपाय किए जा सकते हैं । उनके बारे में जान लेते हैं । दोस्तों जातिवाद को जन्म देने वाली जो ये कुप्रथा है । इसको एकदम से समाप्त नहीं किया जा सकता है । लेकिन इस दिशा में कुछ प्रयास किए जा सकते हैं । जैसे अंतर जाति विवाह को प्रोत्साहन दिया जाए । इससे जाति बंधन ढीले पड़ेंगे । इसके अलावा जातिसूचक उपनाम या जो Title लगाए जाते हैं, उन पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए । साथ ही साथ जातिगत आधार पर होने वाले चुनावों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए और जाति विशेष या वर्ग विशेष के आधार पर इसका विरोध और बहिष्कार किया जाना चाहिए । इसके अलावा जाति प्रथा के विरुद्ध प्रचार प्रसार और लोगों में जागरूकता फैलाना चाहिए और समाज में जो आर्थिक और सामाजिक समानता और भेदभाव है, उसको समाप्त करने की व्यवस्था की जानी चाहिए ।

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इस तरह विभिन्न जाति समूह में विभिन्न जातियों के लोग कुछ जातियों के लोगों को श्रेष्ठ और उच्च मानते हैं । वह अपने आपको और कुछ जातियों को ही मानते है । यह जातिवाद का सबसे बढ़ा दुष्प्रभाव और सबसे अधिक दोष रहा है । लेकिन जब हम अंतरजाति विवाह को प्रोत्साहन देंगे जातिवाद में भेद को खत्म करेंगे । तो इस जातिवाद जैसी बुराई से निपटा जा सकता है ।

तो दोस्तों ये था, जातिवाद का मतलब, इसको बढ़ावा देने वाले कारक, समाज पर इसका प्रभाव और इसे दूर करने के उपाय । अगर Post अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तो के साथ ज़रूर Share करें । तब तक के लिए धन्यवाद !!

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